जेल से बाहर आएंगे छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री लखमा; सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत; शराब घोटाले में थे बंद
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 3, 2026, 04:32 PM IST
राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा को 2 अप्रैल 2025 को एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है।
सुप्रीम कोर्ट
बेहद चर्चित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दे दी है। ये मामले प्रवर्तन निदेशालय और राज्य पुलिस द्वारा अलग-अलग दर्ज किए गए थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह फैसला दिया। जमानत देते समय उन्होंने इस बात को आधार बनाया कि पूर्व मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)द्वारा 15 जनवरी,2025 को धन शोधन के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने के बाद से जेल में रखा गया था।
राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा को 2 अप्रैल 2025 को एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। जमानत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि दोनों मामलों में जांच अभी जारी है और मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान सैकड़ों अभियोजन गवाहों से जिरह होनी शेष है, जिससे सुनवाई लंबी चल सकती है।
राज्य से रहेंगे बाहर, विधानसभा की कार्यवाही में भी नहीं शामिल होंगे
भले ही अदालत ने लखमा को जमानत दे दी है, लेकिन उन्हें कई कड़ी शर्तों को भी मानना होगा। पीठ ने निर्देश दिया कि पूर्व मंत्री राज्य से बाहर रहेंगे और केवल सुनवाई की तारीखों पर ही उन्हें अदालत में पेश होने की अनुमति होगी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि विधायक होने के नाते उन्हें विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।
पासपोर्ट भी करना होगा सरेंडर
इसके साथ ही पीठ ने लखमा को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि वे किसी भी गवाह को प्रभावित करने या जांच में बाधा डालने का प्रयास नहीं करेंगे। जमानत अवधि के दौरान उन्हें जांच एजेंसियों को अपना मोबाइल नंबर और ठिकाने की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
अगर शर्तों का किया उल्लंघन तो...
अदालत ने यह भी कहा कि अगर जमानत के बाद वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं,तो प्रवर्तन निदेशालय या एसीबी/ईओडब्ल्यू जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसी क्रम में, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत याचिकाएं स्वीकार की थीं। ये याचिकाएं ईडी और छत्तीसगढ़ एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों से संबंधित थीं।
2019 से 2022 के बीच हुआ शराब घोटाला
बता दें कि छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच उस समय अंजाम दिया गया,जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हुआ,जबकि शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचा। ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस कथित शराब सिंडिकेट के प्रमुख थे और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से करीब 1,000 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन को अंजाम दिया। वहीं,एसीबी/ईओडब्ल्यू का कहना है कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपराध की आय का उच्च स्तर पर प्रबंधन किया और अपने हिस्से के रूप में लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये हासिल किए।
ये भी हैं मामले में आरोपी
राज्य एजेंसी के अनुसार, इस पूरे कथित घोटाले से जुड़ी अपराध की कुल आय 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। पिछले वर्ष दिसंबर में ईडी ने इस मामले में 59 आरोपियों के खिलाफ अंतिम अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग केस में नामजद आरोपियों की कुल संख्या 81 हो गई। अब जिन 59 लोगों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, उनके विरुद्ध अलग से अंतिम अभियोग शिकायत दर्ज की गई है। इन आरोपियों में सौम्या चौरसिया, पूर्व आईएएस अधिकारी निरंजन दास, शराब लाइसेंस धारक, वितरक और आबकारी विभाग के कई अधिकारी शामिल हैं।
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