7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से शुरू हुई राहुल गांधी की यात्रा कश्मीर तक जाएगी। नए साल से ठीक पहले यात्रा दिल्ली पहुंची थी...अब आगे चलकर ये यात्रा 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक तक पहुंचेगी। जहां पर तिरंगा फहराने की योजना है।तकरीबन, 150 दिनों की इस यात्रा में राहुल गांधी की छवि कैसी बनी ?क्या वो और मजबूत नेता के तौर पर सामने आए ?क्या इस दौरान राहुल की छवि खराब करने की कोशिशें हुईं ?
ये सवाल आज इसलिए उठ रहा है क्योंकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का आरोप है कि एजेंसीज का इस्तेमाल कर...1000 करोड़ रुपए खर्च करके राहुल की छवि खराब की गई ।
सवाल पब्लिक का है कि क्या राहुल गांधी की छवि 1000 करोड़ रुपए खर्च कर खराब की गई ?
और क्या भारत जोड़ो यात्रा के जरिये राहुल गांधी ने वो इमेज बना ली है, जिसके सहारे कांग्रेस 2024 की लड़ाई जीत सकेगी ?
राहुल के खिलाफ झूठा प्रचार या राहुल का 'इमोशनल अत्याचार' ?
यही है आज सवाल पब्लिक का-
3 जनवरी 2023
प्रियंका गांधी, महासचिव, कांग्रेस
मेरे बड़े भाई, सबसे ज्यादा गर्व तुम पर है
सत्ता ने तुम्हारी छवि खराब करने में पूरा जोर लगाया
मेरा भाई योद्धा है
अडानी-अंबानी मेरे भाई को नहीं खरीद पाए
हिटलर के प्रोपेगेंडा मिनिस्टर जोसेफ गोयबल्स का मानना था कि "एक ही झूठ बार-बार बोलो तो उसे लोग सच मान लेते हैं।"क्या राहुल गांधी के खिलाफ भी बार-बार झूठ बोला गया ?क्या राहुल गांधी की नकारात्मक छवि को उनके विरोधियों ने तैयार किया है ?
पहले आप सुनिए राहुल की बहन प्रियंका गांधी का वो बयान जिसमें वो राहुल की छवि के लिए सरकार पर सवाल उठा रही हैं।
प्रियंका गांधी, महासचिव, कांग्रेस
मेरे बड़े भाई, इधर देखो। सबसे ज्यादा गर्व तुम पर है। क्योंकि पूरा सत्ता का जोर लगाया गया। सरकार ने हजार करोड़ रुपए खर्चे, इनकी छवि को खराब करने के लिए। लेकिन ये सच्चाई से पीछे हटे नहीं। इनपर एजेंसियां लगाई गईं, ये डरे नहीं। योद्धा हैं।
आपने प्रियंका के गंभीर आरोपों को सुना।
लेकिन क्या राहुल गांधी की छवि को कोई और बना या बिगाड़ सकता है ?
20 जुलाई 2018 को संसद में राहुल गांधी ने खुद कहा था -
"आपके अंदर मेरे लिए नफरत है, आपके अंदर मेरे लिए गुस्सा है, आपके लिए मैं पप्पू हूं...लेकिन आपके लिए मेरे अंदर इतनी सी भी नफरत नहीं है।"
इस बयान के बाद राहुल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गले मिले थे। फिर संसद में उनकी आंख मारती हुई तस्वीरें भी वायरल हुई थीं।
और आज जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं, तो क्या एक गंभीर नेता के तौर पर सामने आए हैं ?
इन सवालों पर आप खुद अपनी राय तय कर सकें...हाल के उनके तीन बयानों को आपको सुनवा रही हूं..जिन पर सबसे ज्यादा विवाद हुए।
राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं। बीते 22 साल में देश ने उनकी राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
कभी गरीब की झोपड़ी में रात को ठहरने से लेकर भट्टा परसौल और मंदसौर में किसानों के साथ खड़े होने और कलावती नाम की महिला के साथ राहुल गांधी की हमदर्दी ने सुर्खियां बटोरी
विरोधियों के मुताबिक ये सब कुछ राहुल के इमेज मेकओवर का हिस्सा था। लेकिन राहुल गांधी कभी उस तरह से देश की राजनीति में नहीं छा सके, जिस तरह कांग्रेस पार्टी ने उनके लिए प्लान बना रखे हैं।
क्या इसके लिए राहुल खुद जिम्मेदार हैं ?
क्या राजनीति के उनके flip flop इसकी वजह हैं ?
मसलन, चीन के मसले पर राहुल सरकार से गंभीर सवाल पूछते हैं, लेकिन सैनिकों को लेकर पिट जाने जैसा बयान दे देते हैं ?
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस के MoU के आरोपों और डोकलाम संकट के दौरान चीनी राजदूत से राहुल की मुलाकात पर कांग्रेस कभी साफ जवाब भी नहीं दे सकी।
तो उधर कश्मीर में पाकिस्तान की हिमायत करने वाले फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता और RAW के पूर्व चीफ ए एस दुलत जिन पर कश्मीर समस्या को उलझाने का आरोप है वो राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में दिखे हैं।
कभी ये कहने वाली कि "आर्टिकल 370 खत्म होने पर तिरंगा उठाने वाला कश्मीर में नहीं बचेगा"...वो भी राहुल की भारत जोड़ो यात्रा की सहयात्री बनेंगी।पिछले साल अगस्त में वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने जब कांग्रेस छोड़ी थी तब उन्होंने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में राहुल गांधी की राजनीति पर ही सवाल उठाया था।असम के मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा सरमा ने जब कांग्रेस छोड़ी थी तो उन्होंने भी राजनीति में राहुल के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने क्या कहा था सुनिए।
सवाल पब्लिक का-
1. राहुल गांधी की छवि को बिगाड़ा जा रहा है या वो जैसे हैं, वैसी ही उनकी छवि है ?
2. क्या राहुल गांधी के खिलाफ झूठे प्रचार के आरोप भारत जोड़ो यात्रा को सफल बताने का हथकंडा है ?
3. क्या भारत जोड़ो यात्रा से बनी राहुल गांधी की छवि 2024 के चुनाव का अहम फैक्टर होगी ?
