देश

CJP के मंच पर सोनम वांगचुक: NEET-CBSE विवाद में 'कॉकरोच पार्टी' के साथ, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना

सोनम वांगचुक ने X और Instagram पर इस कदम की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'अगर 5 जून तक कुछ नहीं बदलता है, तो मैं 6 जून को दिल्ली में CJP सदस्यों के साथ शामिल होऊंगा।'

Image

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (फाइल फोटो)

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार को घोषणा की कि अगर 5 जून तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वह 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे; उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की आंदोलन की मांग का समर्थन किया। यह घोषणा संस्थापक अभिजीत दिपके के उस संकेत के कुछ ही घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई जानी-मानी हस्ती इस आंदोलन का समर्थन करेगी।

सोनम वांगचुक ने X और Instagram पर इस कदम की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'अगर 5 जून तक कुछ नहीं बदलता है, तो मैं 6 जून को दिल्ली में CJP सदस्यों के साथ शामिल होऊंगा। अगर हालात इतने बिगड़ जाएं, तो किसी भी स्वाभिमानी मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए... लाखों युवाओं के जीवन पर पड़ने वाले असर और वास्तव में भारत के भविष्य पर पड़ने वाले असर की तो बात ही छोड़ दें।'

'दिपके का मकसद देश को बेहतर बनाना है'

एक वीडियो संदेश में, उन्होंने कहा कि उन्होंने दिपके से बात की है और उनके द्वारा साझा किए गए डेटा की समीक्षा की है। वांगचुक ने कहा कि उन्हें यकीन हो गया है कि यह आंदोलन युवाओं की चिंताओं को दर्शाता है और दिपके का मकसद देश को बेहतर बनाना है।

'दोस्तों, पिछली पोस्ट में मैंने आप लोगों से कहा था आप कॉकरोचों से कि आप यह साबित करें, यह यकीन दिलाएं कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भारतीय युवाओं की ही एक अभिव्यक्ति है, न कि किसी विदेशी ताकत की साज़िश। इसके बाद, आप में से कई लोगों ने कमेंट्स में इस बारे में लिखा; फिर दीपके जी ने मुझसे संपर्क किया। मैंने उनसे बात की, और उन्होंने मेरे साथ यह डेटा शेयर किया, जिसे अब मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूं और उनसे बात करने के बाद मुझे लगा कि उनकी कोई गलत मंशा नहीं है; वे बेहद देशभक्त हैं, लेकिन वे देश को बेहतर बनाने के लिए एक त्याग कर रहे हैं एक बलिदान दे रहे हैं।'

NEET और CBSE विवादों से परे का मुद्दा’

यह बताते हुए कि वह इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन क्यों कर रहे हैं, वांगचुक ने कहा कि 'यह मुद्दा NEET, CUET और CBSE परीक्षाओं से जुड़े विवादों से कहीं आगे का है, और यह भारत में शिक्षा की स्थिति को लेकर गहरी चिंताओं को दर्शाता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने दशकों के काम का जिक्र किया और बदलाव की धीमी गति पर निराशा व्यक्त की आपने यह भी देखा होगा कि 6 जनवरी को वह दिल्ली में लोगों को बुला रहे हैं, ताकि हम एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफा मांग सकें। अब, उनके और आप लोगों के लिए वजह NEET के पेपर, या CUET और CBSE के एग्जाम हो सकते हैं। लेकिन मेरे लिए, यह एक बड़ा मुद्दा है।' 'देखिए, पिछले 4 दशकों से, मैं एजुकेशन के लिए लड़ रहा हूं। जैसे ही मैंने इंजीनियरिंग पूरी की, मैंने एजुकेशन को बेहतर बनाना शुरू कर दिया, वह भी सरकारी स्कूलों में, दूर-दराज के गांवों में। और जब मुझे कोई बदलाव नहीं दिखता, तो मुझे निराशा होती है, और मुझे कुछ करने की जरूरत महसूस होती है।'

‘नीतियों को लागू करना एक चिंता का विषय’

वांगचुक ने यह भी कहा कि जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसी नीतिगत पहलें और एक विकसित भारत का सपना काफी उम्मीद जगाने वाले हैं, वहीं ज़मीनी स्तर पर उन्हें लागू करना अभी भी एक चिंता का विषय बना हुआ है। 'तो, सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि हमारी शिक्षा के साथ क्या हो रहा है? बहुत अच्छी-अच्छी नीतियां आ रही हैं, जिनसे मैं बहुत खुश हूं। आपने नई शिक्षा नीति जरूर देखी होगी। लेकिन उस पर कितना अमल हो रहा है, ज़मीनी स्तर पर कितना काम हो रहा है, यह देखकर मुझे बहुत निराशा होती है।'

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article