Sanjay Raut- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के खिलाफ दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने संजय राउत को 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। वहीं, पत्रकार निखिल वागले को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने को कहा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वागले की वर्चुअल उपस्थिति जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।
निखिल वागले ने बिना शर्त माफी मांगी
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने पत्रकार निखिल वागले की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वागले ने बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा दाखिल किया है। जयसिंह ने कहा कि वागले करीब पांच दशक से पत्रकारिता में हैं और अपने पूरे करियर में उन्होंने सत्ता में किसी भी दल के होने की परवाह किए बिना लिखा है। उन्होंने यह भी कहा कि वागले किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और फिलहाल स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं।
इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी गई थी। उन्होंने कहा कि वागले को अपनी टिप्पणी पर पछतावा है और वह उसका बचाव नहीं कर रहे हैं। जयसिंह ने अदालत से शो-कॉज नोटिस वापस लेने का अनुरोध भी किया। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने कहा कि पोस्ट तभी हटाई गई, जब अवमानना याचिका दाखिल हो चुकी थी। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पोस्ट 11 अक्टूबर को की गई थी और करीब पांच दिन बाद हटाई गई।
‘मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली तारीख पर पेश हों’
इंदिरा जयसिंह ने बताया कि उनकी कानूनी सलाह के कारण वागले सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि वागले मुंबई में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर पेश हो सकते हैं। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि फिलहाल उन्हें वर्चुअल माध्यम से पेश होने दिया जाए। यदि जरूरत हुई, तो अगले सप्ताह उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है।
अपने आदेश में बेंच ने कहा कि उसने पहले प्रतिवादी निखिल वागले की ओर से पेश इंदिरा जयसिंह की दलीलें सुनी हैं और उनके द्वारा दाखिल हलफनामे पर भी ध्यान दिया है। वागले की ओर से शो-कॉज नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया गया है। लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई पर वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहें।
संजय राउत की ओर से दाखिल हलफनामा रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बताया कि दूसरे प्रतिवादी संजय राउत ने भी जवाबी हलफनामा दाखिल किया है और अपने सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया है। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि हलफनामे की प्रति अभी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। बेंच ने रजिस्ट्री को हलफनामा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि संजय राउत की ओर से वकील विष्णु शर्मा का वकालतनामा दाखिल होने की जानकारी है, लेकिन कार्यालय की रिपोर्ट में किसी के पेश होने की बात दर्ज नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संजय राउत अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहें।
‘यह पूरी न्यायपालिका से जुड़ा मामला है’
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति या टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी न्यायपालिका की संस्था से जुड़ा है। इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्हें संस्था से प्रेम है, लेकिन संस्था को भी लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कानूनी बिरादरी में निराशा की स्थिति पैदा होती है और उसे दूर करने के प्रयास होने चाहिए। जस्टिस कुमार ने जवाब में कहा कि न्यायपालिका ने दूसरों के लिए आवाज उठाई है और सभी ने मिलकर दूसरों के लिए काम किया है।
क्या है चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अवमानना का मामला?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट दोनों को अवमानना नोटिस जारी कर चुका है।
याचिका के मुताबिक, निखिल वागले ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर CJI के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह पोस्ट INDIA गठबंधन के नेताओं की CJI से मुलाकात की मांग से जुड़ी खबर के संदर्भ में की गई थी। वहीं, संजय राउत ने कथित तौर पर दावा किया था कि CJI समेत 60 से 70 न्यायाधीशों को लंदन में बीजेपी नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते देखा गया था। सुनवाई के दौरान SCBA की ओर से वरिष्ठ वकील राहुल कौशिक, वकील प्रज्ञा बघेल और मनीष दुबे भी पेश हुए।
