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पूरी दुनिया के बाजार क्रैश, इस साल पीक से 59% तक लुढ़के, रिकवरी में कौन आगे?

भारत ही नहीं पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में इस साल तबाही का नजारा देखने को मिला है। दुनिया के बड़े बाजारों में इस साल अब तक पीक से 59% तक लुढ़के हैं। जानें रिकवरी में कौन सबसे आगे है।

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पूरी दुनिया के बाजारों में आई तबाही

Global Stock Markets Crash: दुनिया के शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच कुछ प्रमुख इंडेक्स अपने रिकॉर्ड ऊंचाई से 59% तक टूट चुके हैं। दक्षिण कोरिया के KOSPI से लेकर चीन के Shanghai Composite, जापान के Nikkei 225 और अमेरिकी Nasdaq तक में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, निचले स्तरों से रिकवरी की तस्वीर कुछ अलग है।

KOSPI ने जोरदार वापसी की है, जबकि अमेरिकी टेक शेयरों और जापान के बाजार में भी अच्छी रिकवरी दिखाई दी है। दूसरी तरफ, भारत के Sensex-Nifty और हांगकांग के Hang Seng की वापसी अपेक्षाकृत कमजोर रही है।

KOSPI रिकवरी में भी सबसे आगे

दक्षिण कोरिया का KOSPI इस तुलना में सबसे ज्यादा गिरावट वाला प्रमुख इंडेक्स है। इसका पीक 9,385.59 अंक रहा, जबकि 52-week low 3,833.35 अंक दर्ज किया गया। इस तरह ऊंचाई से निचले स्तर तक इसमें 59.16% की गिरावट आई। हालांकि, 28 अक्टूबर को KOSPI 6.63% उछलकर 6,012.44 अंक पर बंद हुआ। यानी निचले स्तर से इसने करीब 57% की रिकवरी की है, लेकिन यह अब भी अपने पीक से लगभग 36% नीचे है।

Shanghai Composite और Nikkei में भी बड़ी गिरावट

चीन के Shanghai Composite का ऐतिहासिक पीक 6,124.04 अंक और हालिया 52-week low 3,574.27 अंक रहा। इस आधार पर गिरावट 41.64% बैठती है। हालांकि, यह तुलना ऐतिहासिक पीक से है, इसलिए इसे केवल 2026 में आई गिरावट नहीं समझना चाहिए। जापान के Nikkei 225 में पीक से निचले स्तर तक 33.77% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद मौजूदा स्तर के आधार पर Nikkei ने अपने लो से करीब 33% की वापसी की है।

हांगकांग का Hang Seng भी पीक से 32.75% नीचे आया। अमेरिकी Nasdaq Composite की गिरावट 25.37% रही, लेकिन निचले स्तर से करीब 28% की रिकवरी के साथ उसने अपेक्षाकृत मजबूत वापसी दिखाई।

भारत के Sensex-Nifty की रिकवरी सुस्त

भारतीय बाजार भी इस वैश्विक उठापटक से अछूते नहीं रहे। Sensex अपने पीक से 17.25% और Nifty 50 करीब 15.90% तक नीचे फिसले। दिए गए मौजूदा स्तरों के आधार पर दोनों सूचकांकों की अपने 52-week low से रिकवरी लगभग 3% के आसपास है। महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है।

1 साल का लो
देशप्रमुख शेयर सूचकांकऑल-टाइम हाई (ATH)

(52-week Low)पीक से गिरावटमौजूदा स्तर (लगभग)दक्षिण कोरियाKOSPI9,385.593,833.35-59.16%6,012चीनShanghai Composite6,124.043,574.27-41.64%3,681जापानNikkei 22572,831.7348,235.30-33.77%63,954हांगकांगHang Seng33,484.0822,518.00-32.75%23,094अमेरिकाNasdaq Composite27,722.7520,690.25-25.37%26,477अमेरिकाS&P 5007,844.526,316.91-19.47%7,722जर्मनीDAX26,618.7421,863.81-17.86%25,564अमेरिकाDow Jones54,744.3345,057.28-17.69%52,377भारतSensex86,159.0271,292.88-17.25%73,280भारतNifty 5026,373.2022,179.90-15.90%22,770फ्रांसCAC 408,755.037,505.27-14.27%7,887ब्रिटेनFTSE 10010,989.459,423.90-14.25%10,664

ब्राजील का बाजार एक दिन में 14% लुढ़का

ब्राजील के शेयर बाजार में 26 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva की दोबारा जीत के बाद भारी बिकवाली हुई। देश का प्रमुख सूचकांक Ibovespa एक ही कारोबारी दिन में 13.88% लुढ़क गया, जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट थी।

कारोबार के दौरान सूचकांक 17% से ज्यादा तक टूट गया, जिसके बाद एक्सचेंज को अस्थायी रूप से कारोबार रोकना पड़ा। चुनाव से पहले निवेशक विपक्षी उम्मीदवार Flavio Bolsonaro की जीत और संभावित राजकोषीय सुधारों की उम्मीद कर रहे थे।

नतीजे उम्मीद के विपरीत आने से सरकारी खर्च, सार्वजनिक कर्ज और भविष्य की आर्थिक नीतियों को लेकर चिंता बढ़ गई। इसी दौरान ब्राजील की मुद्रा रियल भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8.21% कमजोर हुई।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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