पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मोहाली की एक स्पेशल कोर्ट में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सीनियर लीडर और पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ करीब 40,000 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की। सूत्रों ने दावा किया है कि जांच में बिक्रम सिंह मजीठिया के फाइनेंशियल नेटवर्क, शराब-कंपनी ट्रांसफर और इंटरनेशनल ड्रग डीलरों के साथ लिंक सामने आए हैं।
इस केस में 736.96 करोड़ रुपये के ड्रग मनी ट्रेल का मामला है, जिसमें 161 करोड़ रुपये बिना हिसाब के कैश डिपॉजिट, 141 करोड़ रुपये विदेशी एंटिटी के ज़रिए और 236 करोड़ रुपये बिना बताए कंपनी डिपॉजिट शामिल हैं।
इनकम के ज्ञात सोर्स से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप
मोहाली कोर्ट में जमा की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में गुरमेहर सिंह, मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल, हरप्रीत गुलाटी, अमरदीप सिंह और 10 कंपनियों के नाम हैं, जिससे और भी कथित फाइनेंशियल लिंक न्यायिक जांच के दायरे में आ गए हैं। खबर है कि चार्जशीट में मजीठिया और उनके साथियों से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, बैंक अकाउंट और प्रॉपर्टी से जुड़े सबूत हैं। यह फाइलिंग इस केस में एक अहम डेवलपमेंट है, जिसमें अकाली नेता पर उनकी इनकम के ज्ञात सोर्स से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप है।
'परमिंदर उर्फ ‘पिंडी’ के साथ उनके कनेक्शन पर गंभीर सवाल'
विजिलेंस ब्यूरो का आरोप है कि ये ट्रांजैक्शन 2007-2017 के दौरान जांच के दायरे में आए फाइनेंशियल डीलिंग का हिस्सा थे, यह वह समय था जब मजीठिया पिछली शिरोमणि अकाली दल-BJP सरकार में प्रभावशाली पदों पर थे। सूत्रों ने दावा किया कि जांच से बिक्रम मजीठिया का फाइनेंशियल नेटवर्क, शराब-कंपनी ट्रांसफर और इंटरनेशनल ड्रग डीलरों के साथ संबंध फोकस में आए हैं।पहले के केस रिकॉर्ड भी ड्रग माफिया सतप्रीत सिंह उर्फ ‘सट्टा’ और परमिंदर सिंह उर्फ ‘पिंडी’ के साथ उनके कनेक्शन पर गंभीर सवाल उठाते हैं, जिसमें यह दावा भी शामिल है कि उन्होंने अपने मंत्री रहने के दौरान उन्हें लाने-ले जाने के लिए अपनी गाड़ी का इस्तेमाल किया था।
मजीठिया से जुड़ी कंपनियों से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन
जांच में मजीठिया से जुड़ी कंपनियों से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता चला है, जिसमें सराया इंडस्ट्रीज सेंटर में है। इसमें शराब कंपनियों, संदिग्ध विदेशी कंपनियों और SAD नेता से जुड़े बिजनेस एसोसिएट्स से जुड़े ट्रांजैक्शन का भी पता चला है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने बताया कि जून 2025 में, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने घोषणा की थी कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत 2021 की FIR की उसकी जांच में ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है।
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पार्टी ने कहा, “ब्यूरो की जांच में बिक्रम सिंह मजीठिया के कंट्रोल वाली कंपनियों के अकाउंट में 161 करोड़ रुपये बिना हिसाब के कैश जमा होने, 141 करोड़ रुपये संदिग्ध विदेशी कंपनियों के जरिए जमा होने और 236 करोड़ रुपये ज्यादा जमा होने की जानकारी मिली, जिसका कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट में खुलासा या स्पष्टीकरण नहीं किया गया था। ब्यूरो ने कहा था कि उसकी जांच से पता चला है कि बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़ी कंपनियों, जिसमें सराया इंडस्ट्रीज भी शामिल है, के ज़रिए फंड जमा किए गए थे।”
शराब के बिजनेस और कंपनियों से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांसफर की भी जांच
AAP ने दावा किया कि जांच ने सतप्रीत सिंह उर्फ ‘सट्टा’ और परमिंदर सिंह उर्फ ‘पिंडी’ से जुड़े पहले के केस रिकॉर्ड पर भी फिर से ध्यान खींचा है, जिनके नाम पंजाब सिंथेटिक-ड्रग जांच में आए थे। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया से जुड़े शराब के बिजनेस और कंपनियों से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांसफर की भी जांच की है। 30 नवंबर, 2025 को ब्यूरो ने हरप्रीत सिंह गुलाटी को गिरफ्तार किया, जिसे बिक्रम सिंह मजीठिया का करीबी बताया गया। इसमें कहा गया कि जांच के दौरान हरप्रीत सिंह गुलाटी से जुड़ी कंपनियों और बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़ी एंटिटीज़ से जुड़े मनी ट्रांसफर सामने आए थे।
