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दोगुने हुए किसानों के आत्महत्या के मामले, मोदी सरकार पर भड़के शरद पवार; कर दिया ये बड़ा दावा

Sharad Pawar vs Modi Sarkar: शरद पवार ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए गंभीर आरोप लगाया है। एनसीपी (एसपी) प्रमुख ने दावा किया है कि भाजपा के शासनकाल में किसानों के आत्महत्या के मामले दोगुने हुए हैं। उन्होंने किसानों के मुद्दे को लेकर सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई।

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शरद पवार।

Sharad Pawar on Farmers Suicide Issue: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन पर रविवार को कटाक्ष करते हुए दावा किया कि भाजपा के शासनकाल में किसानों के आत्महत्या करने के मामले दोगुने हुए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता पवार ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के बार्शी कस्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल रहा है और वे कर्ज में डूब गए हैं।

'आय दोगुनी नहीं हुई, आत्महत्या दोगुने हो गए'

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय किसानों के आत्महत्या करने के मामले दोगुने हो गए हैं।' राकांपा (शरदचंद्र पवार) प्रमुख ने कहा कि समय की मांग है कि राज्य में सरकार बदली जाए और ऐसी सरकार स्थापित की जाए जो किसानों, युवाओं और महिलाओं के हितों की रक्षा करे।

'रोजगार की कमी के कारण परेशान हैं युवा'

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, 'केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों ने किसानों की मुश्किलें कम करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए अपनी सत्ता का इस्तेमाल नहीं किया है। आप देखेंगे कि युवा रोजगार की कमी के कारण परेशान हैं। हमें सरकार बदलनी होगी। '

पवार ने कहा कि भाजपा अपने नारे '400 पार' के बावजूद लोकसभा चुनाव में 300 सीटें भी नहीं जीत सकी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, 'आंध्र प्रदेश और बिहार की पार्टियों की मदद से वह सरकार बना सकती है। समय की मांग है कि किसानों पर कर्ज का बोझ कम किया जाए, इसलिए कर्ज माफ किया जाना चाहिए।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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