Sarnath UNESCO World Heritage: भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल 'सारनाथ' को यूनेस्को (UNESCO) की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Sarnath Post) ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का पल करार दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध के साथ गहरा और अटूट संबंध रहा है। बुद्ध के ज्ञान, करुणा और सद्भाव के विचार सदियों से पूरी दुनिया को प्रेरित करते आ रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यह मान्यता भारत की प्राचीन सभ्यता और समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। इससे दुनिया भर के लोगों को सारनाथ आने और भगवान बुद्ध के महान आदर्शों से जुड़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।
इतिहास और बौद्ध परंपरा के दृष्टिकोण से सारनाथ का अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। माना जाता है कि छठी शताब्दी ईसा पूर्व में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कप्पवत्तन) यहीं दिया था और अपने पहले शिष्यों से मुलाकात की थी। स्वयं बुद्ध ने सारनाथ को बौद्ध धर्म के चार सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक बताया था।
सदियों तक राजाओं, बौद्ध भिक्षुओं और आम लोगों के संरक्षण में सारनाथ एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित हुआ, जहां कई स्तूप, मंदिर और विहार बनाए गए। 12वीं शताब्दी के बाद यह स्थल गुमनामी में खो गया था, जिसे 18वीं शताब्दी में पुनः खोजा गया। आज यह स्थान न केवल दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है, बल्कि भारतीय इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का एक बड़ा केंद्र है।
