1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या का मामला एक बार फिर उभर कर सामने आ गया है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने इस मामले में 36 साल बाद 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। श्रीनगर की विशेष टाडा/पोटा (TADA/POTA) अदालत में दाखिल इस चार्जशीट में अलगाववादी नेता यासीन मलिक को इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। एजेंसी ने दावा किया है कि सरला भट की हत्या यासीन मलिक के निर्देश पर की गई थी और इसका मकसद घाटी में आतंक का माहौल पैदा करना तथा कश्मीरी पंडित समुदाय को पलायन के लिए मजबूर करना था।
कौन थीं सरला भट्ट, कैसे हुई हत्या?
अनंतनाग के काजीबाग की रहने वाली 27 साल की सरला भट्ट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में बतौर नर्स तैनात थीं। आतंकियों की ओर से उन्हें लगातार नौकरी छोड़ने और घाटी से चले जाने की धमकियां मिल रही थीं। लेकिन सरला अलगाववादियों की इन धमकियों को नजरअंदाज करती रहीं, जिसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अप्रैल, 1990 को आतंकवादियों ने श्रीनगर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (SKIMS) के हब्बा खातून छात्रावास से 27 वर्षीय सरला भट्ट का अपहरण कर लिया था। कई दिनों तक गैंगरेप करने के बाद सरला का गोलियों से छलनी शव 19 अप्रैल 1990 को श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में मिला।
उनकी हत्या कश्मीर में उग्रवाद के चरम पर हुई थी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी कश्मीरी पंडितों को आतंकित करने और उन्हें पलायन करने के लिए व्यवस्थित रूप से निशाना बना रहे थे। सरला की मौत के बाद भी उनके परिवार को धमकियां दी गईं और उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने की चेतावनी दी गई। पुलिस ने निगीन पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 56/1990 दर्ज की, लेकिन मामले में कोई प्रगति न होने के कारण दशकों तक यह मामला ठंडा पड़ा रहा।
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एसआईए ने पांच लोगों को किया नामजद
SIA ने इस मामले में कुल पांच आरोपियों को नामजद किया है। इनमें यासीन मलिक, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस, गुलाम मोहम्मद टपलू और खुर्शीद अहमद चाल्कू शामिल हैं। इनमें से अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। वहीं हमले का आरोपी खुर्शीद अहमद चाल्कू फरार है। जांच एजेंसी का दावा है कि वह पाकिस्तान भाग चुका है। वहीं, यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है और न्यायिक हिरासत में है।
झूठा 'मुखबिर' बताकर बनाया गया निशाना
चार्जशीट के अनुसार, सरला भट को पहले झूठा पुलिस मुखबिर करार दिया गया। इसके बाद उन्हें निशाना बनाने की साजिश रची गई। एसआईए ने दावा किया है कि सरला भट की हत्या कोई आकस्मिक हुई हत्या नहीं थी, बल्कि पूरी तरह से पूर्व नियोजित आतंकी हमला था।एजेंसी के अनुसार,सरला भट का श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) के पास से अपहरण किया गया। अपहरण के बाद उन्हें जबरन घसीटा गया, शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अंत में गोलियों से भूनकर उनकी हत्या कर दी गई।
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अभियान का हिस्सा थी हत्या
एसआईए का कहना है कि जांच में सामने आया है कि यह हत्या जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF)के उस कथित अभियान का हिस्सा थी, जिसके जरिए घाटी में भय का माहौल बनाकर कश्मीरी पंडितों के बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा दिया गया। चार्जशीट में कहा गया है कि सरला भट की हत्या एक सुनियोजित आतंकी रणनीति के तहत की गई थी ताकि समाज में दहशत फैले।
एसआईए ने चार्जशीट में किन साक्ष्यों को बनाया आधार ?
जांच एजेंसी का कहना है कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला एक-दूसरे की पुष्टि करने वाले मजबूत और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है। चार्जशीट में कई प्रकार के प्रत्यक्ष, मौके पर मिले सबूतों के साथ ही फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।
सबसे अहम साक्ष्यों में गवाहों के बयान शामिल हैं। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज इन बयानों में गवाहों ने बताया कि उन्होंने सरला भट को आरोपियों के साथ अपहरण से ठीक पहले देखा था। गवाहों ने यह भी विस्तार से बताया कि किस तरह JKLF से जुड़े आतंकियों ने उनका अपहरण किया, उन्हें घसीटते हुए ले गए और बाद में उनकी हत्या कर दी।
इसके अलावा कई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शियों ने भी मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस, अब्दुल हमीद शेख, खुर्शीद अहमद चाल्कू और गुलाम मोहम्मद टपलू की पहचान हमले और हत्या में शामिल लोगों के रूप में की है।
घटनास्थल और रास्ते की भी पुष्टि
चार्जशीट में पॉइंटिंग-आउट मेमो और घटनास्थल की पहचान से जुड़े दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं। इनके जरिए उस पूरे रास्ते की पुष्टि की गई है, जहां से आरोपी सरला भट को ले गए थे और जिस स्थान पर उनकी हत्या की गई।
मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट क्या कहती है?
एसआईए के अनुसार, मेडिको-लीगल रिपोर्ट में सरला भट के शरीर पर कई गोली लगने के निशान मिले। रिपोर्ट में अनेक घाव,गंभीर आंतरिक चोटें और शारीरिक यातना के स्पष्ट संकेत दर्ज हैं। वहीं, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की बैलिस्टिक जांच में पुष्टि हुई कि घटनास्थल से बरामद तीनों कारतूस एक ही 7.62×39 मिमी हथियार से चलाए गए थे। यह निष्कर्ष प्रत्यक्षदर्शियों के उन बयानों से मेल खाता है, जिनमें लगातार राइफल से फायरिंग किए जाने का उल्लेख है।
घटनास्थल से मिला था जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का क्लेम लेटर
चार्जशीट के अनुसार, घटनास्थल से JKLF का एक टेरर क्लेम नोट भी बरामद किया गया था, जिसमें हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का उल्लेख किया गया था। हालांकि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी लिखावट के आधार पर यह तय नहीं कर सकी कि यह नोट किस व्यक्ति ने लिखा था,लेकिन SIA का कहना है कि इस दस्तावेज की पुष्टि उस समय प्रकाशित समकालीन मीडिया रिपोर्टों से होती है,जिनमें घटना के तुरंत बाद इसी प्रकार के दावों का उल्लेख किया गया था।बिट्टा कराटे के टीवी इंटरव्यू को भी बनाया गया साक्ष्य
जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे के एक प्रमाणित टेलीविजन इंटरव्यू को भी शामिल किया है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत प्रमाणित इस रिकॉर्डिंग में बिट्टा कराटे ने कथित तौर पर स्वीकार किया था कि उसने वरिष्ठ JKLF नेतृत्व के निर्देश पर लक्षित हत्याओं में भाग लिया था।
एसआईए का कहना है कि यह इंटरव्यू इस बात को मजबूत करता है कि उस समय ऐसी हत्याएं किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं थीं, बल्कि एक संगठित कमांड स्ट्रक्चर के तहत अंजाम दी जा रही थीं।
SKIMS कर्मचारियों ने क्या बताया?
चार्जशीट में SKIMS अस्पताल के कर्मचारियों के बयान भी शामिल किए गए हैं। कर्मचारियों ने जांच एजेंसी को बताया कि लगातार धमकियों के बावजूद सरला भट अपने कर्तव्य पर डटी रहीं और नियमित रूप से अस्पताल आती थीं। घटना वाले दिन भी उन्हें अस्पताल में ड्यूटी करते और बाद में वहां से निकलते हुए देखा गया था। इसके बाद उनका अपहरण कर लिया गया।
अन्य मामलों की जांच में भी मिल सकते हैं नए सुराग
एसआईए का कहना है कि सरला भट हत्याकांड की जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और तथ्यों से कश्मीरी पंडितों की अन्य चर्चित लक्षित हत्याओं की जांच में भी नए सुराग मिले हैं। एजेंसी का मानना है कि इस मामले की विवेचना से उस दौर में हुई अन्य आतंकी वारदातों के पीछे की कथित साजिश और नेटवर्क को समझने में भी मदद मिलेगी।
फिलहाल यह चार्जशीट श्रीनगर की विशेष TADA/POTA अदालत में दाखिल कर दी गई है। अब अदालत इस पर संज्ञान लेने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।