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36 साल बाद फिर चर्चा में सरला भट्ट केस, कौन थीं वो नर्स, जिसकी हत्या ने देश को झकझोर दिया?

14 अप्रैल, 1990 को आतंकवादियों ने श्रीनगर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (SKIMS) के हब्बा खातून छात्रावास से 27 वर्षीय सरला भट्ट का अपहरण कर लिया था।

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क्या था सरला भट्ट हत्याकांड? (AI Image)
Authored by: Amit Mandal
Updated Jun 29, 2026, 14:27 IST
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Who Was Sarla Bhat: कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के अपहरण, बलात्कार, यातना और हत्या के लगभग 36 साल बाद, कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (SIA) श्रीनगर की एक विशेष अदालत में 737 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल करने जा रही है। इसमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक और अन्य आरोपियों के नाम शामिल होंगे। जांच में जेकेएलएफ के तत्कालीन प्रमुख कमांडर मोहम्मद यासीन मलिक, खुर्शीद अहमद चल्को, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू को सरला भट्ट के अपहरण, बलात्कार और क्रूर हत्या में शामिल होने का सबूत मिला है। सरला भट्ट की की बेरहम हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

कौन थीं सरला भट्ट, कैसे हुई हत्या?

अनंतनाग के काजीबाग की रहने वाली 27 साल की सरला भट्ट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में बतौर नर्स तैनात थीं। आतंकियों की ओर से उन्हें लगातार नौकरी छोड़ने और घाटी से चले जाने की धमकियां मिल रही थीं। लेकिन सरला अलगाववादियों की इन धमकियों को नजरअंदाज करती रहीं, जिसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अप्रैल, 1990 को आतंकवादियों ने श्रीनगर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (SKIMS) के हब्बा खातून छात्रावास से 27 वर्षीय सरला भट्ट का अपहरण कर लिया था। कई दिनों तक गैंगरेप करने के बाद सरला का गोलियों से छलनी शव 19 अप्रैल 1990 को श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में मिला। पोस्टमार्टम में गैंगरेप और गोली लगने से मौत की पुष्टि हुई। उनके साथ दुष्कर्म हुआ था और भयंकर यातनाएं दी गई थीं।

उनकी हत्या कश्मीर में उग्रवाद के चरम पर हुई थी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी कश्मीरी पंडितों को आतंकित करने और उन्हें पलायन करने के लिए व्यवस्थित रूप से निशाना बना रहे थे। सरला की मौत के बाद भी उनके परिवार को धमकियां दी गईं और उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने की चेतावनी दी गई। पुलिस ने निगीन पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 56/1990 दर्ज की, लेकिन मामले में कोई प्रगति न होने के कारण दशकों तक यह मामला ठंडा पड़ा रहा।

सरला भट्ट केस समझें

सरला भट्ट केस समझें

कश्मीरी पंडितों का 1990 में पलायन

सरला भट की हत्या उन कई आतंकी घटनाओं में से एक थी, जिनके कारण 1990 के दशक की शुरुआत में लगभग पूरा कश्मीरी पंडित समुदाय घाटी छोड़कर चला गया। पाकिस्तान समर्थित समूहों, जैसे कि जेकेएलफ और हिज्बुल मुजाहिदीन ने प्रमुख पंडितों की हत्या की, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों के माध्यम से परिवारों को धमकाया और उनके घरों पर हमले की योजना बनाई। घाटी भर की मस्जिदों से निज़ाम-ए-मुस्तफा (इस्लामी शासन) की मांग वाले नारे गूंजने लगे और पंडितों को चेतावनी दी गई कि वे घाटी छोड़ दें, इस्लाम धर्म अपना लें या मौत का सामना करें। आतंकवादियों ने हत्यारों की सूचियां बांटीं, महिलाओं को अपहरण की धमकियां दीं और भयानक हत्याओं के जरिए दहशत फैलाई। कुछ ही हफ्तों में लगभग 3-4 लाख पंडित जम्मू, दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में भाग गए।

36 साल बाद इंसाफ की जगी आस

सरला भट्ट के अपहरण, यातना और हत्या के पैंतीस साल बाद अगस्त 2025 में जम्मू और कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने उनके मामले को फिर से खोल दिया था। इससे परिवार में न्याय की उम्मीदें जग गईं। उन्होंने न्याय की उम्मीद छोड़ दी थी, जो उन्हें वर्षों पहले नहीं मिला। सरला की हत्या कश्मीरी पंडितों के पलायन में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। श्रीनगर के बीचोंबीच गोलियों से छलनी शव को एक नोट के साथ फेंके जाने के दृश्य ने घाटी में रहने की समुदाय की बची-खुची उम्मीदों को भी चकनाचूर कर दिया था। इसके तुरंत बाद, बाकी पंडित परिवार, जो अभी तक भागे नहीं थे, रात के अंधेरे में पलायन करने लगे।

फिर 2025 में सरला भट के मामले की खबर ने कश्मीरी पंडित परिवारों में 1990 के दशक की यादें ताजा कर दी हैं जिनमें से अधिकांश अब जम्मू में रहते हैं, जबकि कुछ अभी भी घाटी के चुनिंदा इलाकों में रहते हैं। हालांकि, जब उनकी हत्या हुई, तो उनकी मौत की खबर शायद ही सुर्खियों में आई। 19 अप्रैल 1990 को एक स्थानीय अखबार ने इसे एक ही पंक्ति में छापा: "घाटी में नर्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई।" जबकि मामला इतना सीधा नहीं था। सरला के साथ न सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था बल्कि उन्हें भयंकर यातनाएं भी दी गई थीं। कमजोर कश्मीरी पंडितों की आवाज तब दबकर रह गई थी। लेकिन केंद्र में सरकार बदलने के साथ ही हालात भी बदले और सरला भट्ट केस दोबारा खोला गया।

कैसे खोला गया मामला?

1 अगस्त 2025 को LG मनोज सिन्हा श्रीनगर में एक उच्च-स्तरीय बैठक की। एलजी इस बैठक में 1990 के दशक में की गई कश्मीरी हिंदुओं की लक्षित हत्याओं के मामलों को फिर से खोलने के निर्देश दिया। इसके बाद अगस्त 2025 में SIA ने सरला भट्ट मर्डर केस मामले में फिर से जांच शुरू की। 12 अगस्त 2025 को SIA ने इसी केस में श्रीनगर में 8 जगहों पर छापेमारी की। इसमें यासीन मलिक समेत JKLF के कई आतंकियों के ठिकाने शामिल थे।

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