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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, समलैंगिक शादी के सवालों को संसद के लिए छोड़ने पर करें विचार

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 26, 2023, 03:40 PM IST

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से इस मुद्दे को संसद पर छोड़ने का आग्रह किया।

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सुप्रीम कोर्ट

Photo : BCCL

Same-Sex Marriage: केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह समलैंगिक विवाहों को कानूनी मंजूरी देने की मांग करने वाली याचिकाओं में उठाए गए सवालों को संसद के लिए छोड़ देने पर विचार करे। केंद्र की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि शीर्ष न्यायालय एक बहुत ही जटिल मुद्दे से निपट रहा है, जिसका गहरा सामाजिक प्रभाव है।

उन्होंने न्यायमूर्ति एस. के. कौल, न्यायमूर्ति एस.आर. भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ से कहा कि कई अन्य विधानों पर भी इसका अनपेक्षित प्रभाव पड़ेगा, जिस पर समाज में और विभिन्न राज्य विधानमंडलों में चर्चा करने की जरूरत होगी।

संसद कानून बना सकती है

इस दौरान एसजी मेहता ने कहा कि विवाह के अधिकार ने केंद्र को विवाह की नई परिभाषा बनाने के लिए बाध्य नहीं किया। संसद ऐसा कानून बना सकती है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से इस मुद्दे को संसद पर छोड़ने का आग्रह किया।

एसजी मेहता ने कहा कि अदालत एक बहुत ही जटिल विषय से निपट रही है जिसका गहरा सामाजिक प्रभाव है। वह सवाल उठाता है कि शादी किससे और किसके बीच होती है, इस पर कौन फैसला करेगा।

सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की दलीलों के खिलाफ मार्च में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि पार्टनर के रूप में एक साथ रहना और समलैंगिक व्यक्तियों द्वारा यौन संबंध बनाना भारतीय परिवार इकाई एक पति, एक पत्नी और उनसे पैदा हुए बच्चों के साथ तुलनीय नहीं है। केंद्र ने जोर देकर कहा कि समलैंगिक विवाह सामाजिक नैतिकता और भारतीय लोकाचार के अनुरूप नहीं है।

एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि शादी की धारणा ही अनिवार्य रूप से विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के बीच एक संबंध को मानती है। यह परिभाषा सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी रूप से विवाह के विचार और अवधारणा में शामिल है और इसे न्यायिक व्याख्या से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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