दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आत्मनिर्भरता सभी मुद्दों की कुंजी है और उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। आत्मनिर्भरता की पुरज़ोर वकालत करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार स्वेच्छा से होना चाहिए न कि किसी प्रकार के दबाव में। उन्होंने हालिया के अमेरिकी टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद पर ध्यान केंद्रित करते हुए इशारा किया।
भागवत ने कहा कि आत्मनिर्भर होने का मतलब आयात बंद करना नहीं है। दुनिया इसलिए चलती है क्योंकि यह एक-दूसरे पर निर्भर है। इसलिए आयात-निर्यात जारी रहेगा। हालांकि, इसमें कोई दबाव नहीं होना चाहिए। स्वदेशी का मतलब उन वस्तुओं का आयात न करना नहीं है जो देश में पहले से मौजूद हैं या जिनका निर्माण आसानी से किया जा सकता है। बाहर से सामान लाने से स्थानीय विक्रेताओं को नुकसान होता है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा के हवाले से भागवत की यह टिप्पणी ऐसे दिन आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल की खरीद पर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। जो कुछ भी आपके देश में बनता है, उसे बाहर से आयात करने की कोई ज़रूरत नहीं है। जो कुछ भी जीवन के लिए ज़रूरी है और आपके देश में नहीं बनता, उसे हम बाहर से आयात करेंगे। देश की नीति स्वेच्छा से बनानी चाहिए, किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए। यही स्वदेशी है," भागवत ने कहा।
मीडिया पर क्या बोले आरएसएस प्रमुख?
इसके अलावा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मीडिया को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि मीडिया में बहुत सारी नकारात्मक खबरें आती हैं...लेकिन भारत में समाज आज की तुलना में 40 गुना बेहतर है। अगर कोई केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर भारत का मूल्यांकन करता है, तो यह गलत होगा।
