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जाति जनगणना के लिए पीएम मोदी को रेवंत रेड्डी ने कहा धन्यवाद; 'तेलंगाना की सोच को मिला राष्ट्रीय समर्थन'

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाति जनगणना पर फैसला लेने के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि तेलंगाना की सोच को राष्ट्रीय समर्थन मिला। सीएम रेड्डी ने आगे कहा कि जाति जनगणना पर पीएम मोदी का धन्यवाद। आपको रिपोर्ट में बताते हैं कि उन्होंने क्या कुछ कहा।

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सीएम रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को कहा- धन्यवाद।

Revanth Reddy Thanks to PM Modi on Caste Census: देश में सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़े कदम के तहत केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़े शामिल करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का स्वागत करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इसे "ऐतिहासिक निर्णय" बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

सीएम रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया पर लिखा

"तेलंगाना आज जो करता है, भारत कल वो करता है। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्रिमंडल का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने जाति जनगणना की वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार किया। यह डेटा आधारित शासन और सामाजिक न्याय की जीत है।"

तेलंगाना ने 2024 में देश का पहला सामाजिक, आर्थिक और जातीय सर्वेक्षण कराया था, जो 1931 के बाद पहली बार हुआ। इस सर्वे में सामने आया कि राज्य की 56.32% आबादी पिछड़े वर्गों (OBC) से है, जिसके आधार पर सरकार ने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 42% आरक्षण का प्रस्ताव रखा।

जाति जनगणना के फैसले पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?

केंद्र सरकार के फैसले की सराहना देशभर के कई नेताओं ने की। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी तेलंगाना सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: "मैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री @revanth_anumula गरु को ऐतिहासिक जाति जनगणना के लिए बधाई देता हूं। यह स्वतंत्र भारत में अपनी तरह की पहली पहल थी।"

ओवैसी ने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और विभिन्न उप-जातियों की स्थिति पर भी पारदर्शी डेटा जुटाना जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सर्वेक्षण के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं और उन्हीं के अनुरूप नीतियां बनाई जाएं ताकि वंचित वर्गों को उनका हक मिल सके।

तेलंगाना की पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा दी है। अब जब केंद्र सरकार भी आगे बढ़ी है, तो उम्मीद की जा रही है कि जाति जनगणना देश में समावेशी और न्यायसंगत विकास की नींव रखेगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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