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अदालत से हटाइए अंबेडकर का फोटो, सिर्फ...सर्कुलर जारी कर HC ने दे दिया आदेश, जानिए क्या है पूरा माजरा

  • Produced by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Jul 23, 2023, 11:14 AM IST

इस बीच, तमिलनाडु में मंदिर में आयोजन (मंदिर में मूर्ति ले जाने पर खींचतान) पर पनपे विवाद को लेकर जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो वहां जस्टिस ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट की ओर से कहा गया कि इस तरह के आयोजन हिंसा के मंच बन गए हैं और मंदिरों को शक्ति प्रदर्शन का प्लैटफॉर्म बना दिया गया है।

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भीमराव अंबेडकर राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक भी थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। (फाइल)

Photo : iStock

भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर का फोटो अब तमिलनाडु और पुडुचेरी की अदालतों में नहीं लगाया जा सकेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी करते हुए इस बाबत आदेश दिए हैं। कोर्ट की ओर से बताया गया कि कोर्ट के भीतर सिर्फ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और तमिल कवि तिरुवल्लुवर की तस्वीरें भी लगाई जा सकेंगी।

हाईकोर्ट का यह सर्कुलर सात जुलाई, 2023 को रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से सभी जिला अदालतों को भेजा गया था। कोर्ट ने इसके जरिए कांचीपुरम के प्रधान जिला न्यायाधीश को अलंदुर में बार एसोसिएशन के नवनिर्मित संयुक्त न्यायालय परिसर के एंट्री गेट से बाबा साहेब की तस्वीर हटाने के लिए कहा। कोर्ट ने उन घटनाओं को हवाला दिया, जिनमें राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई थी और बाद में विवाद-टकराव और कानूनी समस्याओं से जुड़ी नौबत पनपी थीं।

दरअसल, पूरा मामला कई अधिवक्ता संघों से मिले अभ्यावेदनों से जुड़ा है, जिनमें अंबेडकर और उनसे जुड़े संघ के सीनियर अधिकवक्ताओं के चित्रों का अनावरण करने के लिए मंजूरी मांगी गई थी। हाईकोर्ट की पूरी बेंच ने इस तरह के सभी अनुरोधों को 11 अप्रैल को हुई बैठक के दौरान खारिज कर दिया था।

मंदिर को लेकर भी अन्य केस में कोर्ट की अहम टिप्पणी

इस बीच, तमिलनाडु में मंदिर में आयोजन (मंदिर में मूर्ति ले जाने पर खींचतान) पर पनपे विवाद को लेकर जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो वहां जस्टिस ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट की ओर से कहा गया कि इस तरह के आयोजन हिंसा के मंच बन गए हैं और मंदिरों को शक्ति प्रदर्शन का प्लैटफॉर्म बना दिया गया है। ऐसे मंचों में असल में कोई भक्ति नहीं है। दुर्भाग्य है कि मंदिर उत्सव हिंसा को बढ़ावा देने के मंच बन गए हैं। यह सिर्फ उनके लिए एक दिखावा होता जा रहा है।
अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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