Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कल हम अखबार में पढ़ रहे थे कि आपने बड़ी संख्या में शिकायतें दाखिल की हैं। अपनी ऊर्जा उन शिकायतों पर केंद्रित कीजिए तभी कुछ रचनात्मक परिणाम सामने आएंगे। जस्टिस बागची ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मामले आतंकवाद से जुड़े अभियोजन की तरह दायर किए जा रहे हैं, जबकि आपका उद्देश्य पहले ही पूरा हो चुका है।
कोर्ट में उठा 'बल्क कंप्लेंट्स' का मुद्दा
सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में शिकायतों का मुद्दा भी उठा। 'बल्क कंप्लेंट्स' से आशय ऐसी स्थिति से है जब बड़ी संख्या में एक जैसे आरोपों से जुड़ी शिकायतें व्यक्तियों या कंपनियों के खिलाफ दर्ज की जाती हैं। आम तौर पर ये शिकायतें मनीलॉन्ड्रिंग या विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन से संबंधित होती हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय आमतौर पर स्वतः संज्ञान नहीं लेता, लेकिन अगर बड़ी संख्या में शिकायतें मिलती हैं तो धन शोधन निवारण अधिनियम 2002(PMLA) के तहत जांच शुरू की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से हेमंत सोरेन को फिलहाल बड़ी राहत मिली है और ईडी की आगे की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग गई है।
ED को नोटिस भी जारी किया
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोरेन की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस भी जारी किया। सोरेन ने अपनी याचिका में झारखंड उच्च न्यायालय के हालिया फैसले को चुनौती दी है जिसमें उनके खिलाफ मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। ईडी द्वारा दायर एक मामले में एक विशेष सांसद-विधायक (एमपी-एमएलए) अदालत द्वारा सोरेन के खिलाफ संज्ञान लिया था। शीर्ष अदालत ने 15 जनवरी को इसे रद्द करने से इनकार कर दिया जिससे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता को झटका लगा।
जमीन घोटाले में कथित संलिप्तता से जुड़े मामले में जारी समन के बावजूद ईडी के समक्ष पेश नहीं होने के कारण जांच एजेंसी ने सोरेन के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।
