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राहुल गांधी ने SEBI पर खड़े किए सवाल, कहा- आम लोगों को चूना लगाने वाले 'बड़े खिलाड़ियों' के नाम बताएं

Rahul Gandhi: सेबी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि कि वायदा एवं विकल्प खंड में बीते वित्त वर्ष 2023-24 में 91 प्रतिशत यानी 73 लाख व्यक्तिगत कारोबारियों को नुकसान हुआ है। इन कारोबारियों को औसतन 1.2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का शुद्ध घाटा हुआ।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर से सेबी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सेबी से तथाकथित बड़े खिलाड़ियों के नामों का खुलासा करने की मांग की है। उन्होंने वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) खंड में बीते वित्त वर्ष 2023-24 में 91 प्रतिशत व्यक्तिगत कारोबारियों को हुए नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि सेबी को सभी तथाकथित बड़े खिलाड़ियों के नामों का खुलासा करना चाहिए।

राहुल गांधी की यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी और सेबी के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिसमें विपक्ष अक्सर सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साध रहा है। वहीं, सेमी ने बीते सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें वायदा एवं विकल्प खंड में बीते वित्त वर्ष 2023-24 में 91 प्रतिशत यानी 73 लाख व्यक्तिगत कारोबारियों को नुकसान की बात कही गई थी।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, विगत पांच वर्षों में अनियंत्रित एफ एंड ओ कारोबार 45 गुना बढ़ गया है। 90 प्रतिशत छोटे निवेशकों को 3 साल में 1.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सेबी को तथाकथित बड़े खिलाड़ियों के नामों का खुलासा करना चाहिए। बता दें, सोमवार को सेबी ने एक रिपोर्ट में कहा था कि कि वायदा एवं विकल्प खंड में बीते वित्त वर्ष 2023-24 में 91 प्रतिशत यानी 73 लाख व्यक्तिगत कारोबारियों को नुकसान हुआ है। इन कारोबारियों को औसतन 1.2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का शुद्ध घाटा हुआ। इसके अलावा, वायदा एवं विकल्प खंड से जुड़े एक करोड़ से अधिक व्यक्तिगत कारोबारियों में से 93 प्रतिशत को तीन साल यानी वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान प्रति कारोबारी औसतन लगभग दो लाख रुपये (लेन-देन लागत सहित) का नुकसान हुआ। इस अवधि के दौरान ऐसे कारोबारियों का कुल घाटा 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में ही कारोबारियों को कुल मिलाकर लगभग 75,000 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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