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राहुल गांधी ने लालू के घर पकाया चंपारण मीट, प्रियंका के लिए भी कराया पैक; देखें वीडियो

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 2, 2023, 07:54 PM IST

Rahul Gandhi cooks meat with Lalu Yadav: राहुल गांधी ने अपने यूट्यूब पर वीडियो साझा करते हुए लिखा है, लालू जी एक लोकप्रिय राजनेता हैं, ये सभी जानते हैं। मगर उनकी छुपी हुई एक और कला है - खाना बनाना। उनके थोड़े स्वस्थ होने के बाद उनसे मिलने का मौका मिला तो सोचा क्यों न उनकी सीक्रेट रेसिपी भी सीख लूं।

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राहुल गांधी ने लालू यादव से सीखी सीक्रेट रेसिपी

Photo : Twitter

Rahul Gandhi cooks meat with Lalu Yadav: मुंबई में INDIA गठबंधन की तीसरी बैठक के बाद शनिवार को कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो जारी किया है। यह वीडियो तब का है, जब राहुल गांधी, लालू यादव के दिल्ली स्थित घर पर पहुंचे थे। उन्होंने मीसा भारती और तेजस्वी यादव से भी मुलाकात की थी। इस दौरान राहुल गांधी ने लालू यादव से न केवल मटन बनाना सीखा बल्कि उनसे राजनीति के भी गुर सीखे।

ट्विटर पर इस वीडियो को राहुल गांधी ने भी शेयर किया है। उन्होंने लिखा है लोकप्रिय नेता, लालू जी से उनकी सीक्रेट रेसिपी और 'राजनीतिक मसाले' पर दिलचस्प बातचीत हुई। ग़रीबों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए INDIA की सोच एक है - समानता, प्रगति और सशक्तिकरण।

खाना बनाना लालू जी की छुपी हुई कला

इस वीडियो को राहुल गांधी ने अपने यूट्यूब पर साझा करते हुए लिखा है, लालू जी एक लोकप्रिय राजनेता हैं, ये सभी जानते हैं। मगर उनकी छुपी हुई एक और कला है - खाना बनाना। उनके थोड़े स्वस्थ होने के बाद उनसे मिलने का मौका मिला तो सोचा क्यों न उनकी सीक्रेट रेसिपी भी सीख लूं। अपने घर पर उन्होंने और उनके परिवार ने मेरा बहुत आह्लाद से स्वागत किया। प्यार से सिखाते हुए, बहुत स्वादिष्ट भोजन करवाया। हमारा गठबंधन, INDIA, भाजपा की विभाजनकारी नीतियों और नफ़रत की राजनीति के विरुद्ध खड़ा है। INDIA, ग़रीबों, कमज़ोरों और अल्पसंख्यकों की आवाज़ के लिए खड़ा है। सत्य के रास्ते पर चल कर मोहब्बत की दुकानें खोलना - ये हम सभी का कर्तव्य है, और लक्ष्य भी। आज, हमारा देश महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रहा है। हम रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम कम करने, और रोज़गार के नए अवसर पैदा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

राहुल ने प्रियंका के लिए मांगा खाना

वीडियो में देखा जा सकता है कि राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी के लिए भी खाना मांगते दिख रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मैं अगर उसके लिए खाना नहीं ले गया तो बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी। इस दौरान प्रियंका गांधी घर पर मटन का आनंद लेती दिख रही हैं। वह पूछती हैं कि सच बताओ यह मटन किसने पकाया है। इस पर राहुल गांधी जवाब देते हैं- यह हर किसी ने पकाया है, मैंने, लालू जी ने और मीसा ने।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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