Rahul Gandhi News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के फैसले का विरोध किया है। कांग्रेस सांसद ने शुक्रवार को कहा कि देश के उद्योगों को खड़ा करने के लिए कांग्रेस के समय में IDBI बना था। X पर अपने पोस्ट में आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि पीएम मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस की सरकार में बैंक बनते थे लेकिन मोदी के समय में वे बिकते हैं। राहुल ने कहा कि वह IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।
'सौदे में बैंक की संपत्तियों का कम मूल्यांकन हो सकता है'
इससे पहले मंच के संयोजक देवीदास तुलजापुरकर ने बृहस्पतिवार को यहां आईडीबीआई के निजीकरण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि मौजूदा फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है, जब बाजार में उतार-चढ़ाव है। ऐसे में सावधानी, पारदर्शी मूल्यांकन और व्यापक सार्वजनिक चर्चा जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि इस सौदे में बैंक की संपत्तियों, संस्थागत क्षमताओं, ग्राहक संबंधों, भविष्य की कमाई और रणनीतिक महत्व का कम मूल्यांकन हो सकता है।
सरकार ने 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूदी दी थी
सरकार ने 14 अक्टूबर को बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 53,000 करोड़ रुपये में फेयरफैक्स को बेचने की मंजूरी दी थी। इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,620 करोड़ रुपये और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,440 करोड़ रुपये की है। भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय मंजूरी मिलने पर इस सौदे के चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। तुलजापुरकर ने कहा कि सरकार को मूल्यांकन की पद्धति, उसके आधार, अचल संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों के आकलन तथा बिक्री मूल्य स्वीकार करने के कारणों का खुलासा करना चाहिए। जनता को यह भरोसा मिलना चाहिए कि राष्ट्रीय संपत्ति का हस्तांतरण बहुत कम कीमत पर नहीं किया जा रहा है।
नियामकीय रिकॉर्ड की भी पारदर्शी जांच की मांग
उन्होंने प्रस्तावित खरीदार के स्वामित्व ढांचे, वित्तीय स्थिति और नियामकीय रिकॉर्ड की भी पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी बड़े भारतीय बैंक का नियंत्रण हस्तांतरित करने के मामले में केवल नियामकीय मंजूरी सार्वजनिक जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती। संयुक्त मंच ने कहा कि आईडीबीआई को बैंकिंग कंपनी में बदलते समय संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने सरकार की हिस्सेदारी कम-से-कम 51 प्रतिशत बनाए रखने का आश्वासन दिया था। तुलजापुरकर ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि मौजूदा फैसला उस आश्वासन के अनुरूप कैसे है। उन्होंने कहा कि निजीकरण से आरक्षण, वंचित समुदायों के लिए अवसर, रोजगार सुरक्षा, वित्तीय समावेश और विकासोन्मुख ऋण व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए।
बैंक में कुल 19,108 कर्मचारी
बैंक में कुल 19,108 कर्मचारी हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 9,500 कर्मचारी, 6,911 महिलाएं और 884 दिव्यांग कर्मचारी शामिल हैं। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास आईडीबीआई बैंक की क्रमशः 45.48 प्रतिशत और 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
