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किसान नेता डल्लेवाल को बड़ी फोर्स में लेकर आई पुलिस; छावनी में तब्दील हुआ जालंधर का PIMS अस्पताल

जालंधर में PIMS अस्पताल छावनी में तब्दील हो गया है। इस बीच सूत्रों के हवाले से ये खबर सामने आई है कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को पंजाब पुलिस बड़ी फोर्स में लेकर आई है। एक दिन पहले ही पुलिस ने किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और डल्लेवाल सहित कई किसान नेताओं को मोहाली में हिरासत में ले लिया गया था।

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सूत्रों ने बताया- किसान नेता डल्लेवाल को बड़ी फोर्स में PIMS अस्पताल लेकर आई पुलिस।

Punjab: किसानों की केंद्र के साथ बेनतीजा रही मीटिंग के बाद पंजाब पुलिस ने एक्शन लेते हुए बॉर्डर से किसानों के लगे टेंट उखाड़ दिए और कई किसान नेताओं को पुलिस ने डिटेन कर लिया। पुलिस ने किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया है। इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारी फोर्स के साथ किसान नेता डल्लेवाल को पुलिस देर रात 2:00 बजे जालंधर के पिम्स अस्पताल में लेकर आई है।

डल्लेवाल को बड़ी फोर्स में लेकर आई पुलिस: सूत्र

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल PIMS अस्पताल मिलने को लेकर पुलिस कोई पुष्टि नहीं कर रही है, लेकिन पिम्स अस्पताल में भारी फोर्स तैनात कर दी गई है जिसकी वीडियो भी सामने आई है। देर रात अस्पताल में कुछ गाड़ियां गई है। इस दौरान अस्पताल में मरीजों के परिजनों को पुलिस द्वारा अंदर नहीं जाने दिया जा रहा, जिसके कारण उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं आज सुबह भी देखा जा सकता है कि अस्पताल के बाहर भारी मात्रा में पुलिस तैनात है। डल्लेवाल को PIMS अस्पताल में दाखिल करने को लेकर पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साधी हुई है, जिसको लेकर कोई भी अधिकारी डल्लेवाल के पिम्स अस्पताल में भर्ती होने को लेकर बयान नहीं दे रहा।

पंजाब पुलिस ने शंभू और खनौरी सीमा से किसानों को हटाया

पंजाब पुलिस ने एक साल से अधिक समय से डेरा डाले किसानों को शंभू और खनौरी सीमा पर स्थित धरना स्थलों से हटा दिया है। इससे पहले पुलिस ने किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल सहित कई किसान नेताओं को केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद लौटते समय मोहाली में हिरासत में ले लिया था। पुलिस सूत्रों ने बुधवार देर रात बताया कि अस्थायी ढांचों और मंचों को हटाने तथा किसानों द्वारा खड़ी ट्रॉलियों और अन्य वाहनों को हटाने के बाद प्रदर्शन स्थल को खाली करा दिया गया है।

पुलिस ने बताया बाधित सड़कों पर कब बहाल होगा यातायात

यह पूछे जाने पर कि बाधित सड़कों पर यातायात कब बहाल होगा, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पंजाब की तरफ की सड़क खाली होने के बाद यातायात की बहाली इस बात पर निर्भर करेगी कि हरियाणा सरकार अवरोधक कब हटाती है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली कूच करने से रोके जाने के बाद पिछले साल 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू (शंभू-अंबाला) और खनौरी (संगरूर-जींद) सीमा पर डेरा डाले हुए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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