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जिस बंगले में रहते थे केजरीवाल, उसी में रहेंगी CM आतिशी, विवाद के बाद PWD ने किया आवंटित

Delhi CM Atishi Bungalow: पीडब्ल्यूडी ने आखिरकार सीएम आतिशी को औपचारिक रूप से 6 फ्लैग रोड स्थिति बंगला आवंटित कर दिया है। यह वही बंगला है, जिसमें पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल रहा करते थे।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को बंगाल आवंटित।

Photo : Twitter

Delhi CM Atishi Bungalow: दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को लेकर छिड़ा बंगला विवाद शुक्रवार आखिरकार थम गया है। पीडब्ल्यूडी ने आखिरकार सीएम आतिशी को औपचारिक रूप से 6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थिति बंगला आवंटित कर दिया है। यह वही बंगला है, जिसमें पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल रहा करते थे। बता दें, दो दिन पहले आतिशी को इस बंगले को खाली करने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया गया था, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने बंगले को सील कर दिया था।

अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से जारी प्रस्ताव पत्र में कहा गया है कि बंगला सौंपे जाने और सामान की सूची बनाने की उचित प्रक्रिया पूरी करने के बाद सिविल लाइंस स्थित बंगला औपचारिक रूप से आतिशी को आवंटित कर दिया गया है। बता दें, इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 6, फ्लैगस्टाफ रोड बंगला खाली किए जाने के बाद से ही यह आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ था।

बाहर निकाले गए सामान के बीच सामने आई थीं आतिशी की तस्वीरें

बता दें, आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को कुछ तस्वीरें साझा कर दावा किया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी अपने कालकाजी स्थित आवास पर सामान के कार्टन के बीच फाइलों पर दस्तखत कर रही हैं। इससे एक दिन पहले पार्टी ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय राजधानी के 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगले को ‘जबरन खाली’ कराया गया है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए ‘आप’ नेता संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लिया और कहा कि वह दिल्ली के लोगों के लिए काम करने के आतिशी के जज़्बे को नहीं छीन सकती।

उन्होंने भाजपा पर नवरात्रि में एक महिला मुख्यमंत्री का सामान उनके ‘घर’ से फिंकवाने का भी आरोप लगाया।

एलजी ऑफिस का भी आया था जवाब

आम आदमी पार्टी की ओर से आरोप लगाए जाने के बाद उपराज्यपाल कार्यालय ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास को सील करने और मुख्यमंत्री आतिशी का सामान बाहर किए जाने पर बयान दिया था। उपराज्यपाल की तरफ से कहा गया कि आतिशी को आधिकारिक रूप से सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अवैध रूप से सरकारी बंगले में घुसने की कोशिश की थी और जब आप किसी के घर में घुसते हैं, तो स्वाभाविक है कि उस घर का मालिक आपके खिलाफ कार्रवाई करेगा ही।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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