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प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों ने संसद परिसर में किया प्रदर्शन, वायनाड के लिए राहत पैकेज की मांग की

Opposition MP's Protest: वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित केरल के विपक्षी सांसदों ने वायनाड में भूस्खलन प्रभावित लोगों के लिए वित्तीय सहायता की मांग को लेकर संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रियंका और कई अन्य सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए वायनाड के लिए राहत पैकेज की मांग की।

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विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में किया विरोध प्रदर्शन

Relief Package for Wayanad: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और केरल के कई अन्य सांसदों ने शनिवार को वायनाड की भूस्खलन त्रासदी के पीड़ितों के लिए राहत पैकेज की मांग को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया। संसद भवन के ‘मकर द्वार’ के निकट प्रियंका गांधी और कई अन्य सांसद एकत्र हुए और ‘वायनाड के साथ भेदभाव बंद करो’ के नारे लगाए।

'वायनाड को विशेष पैकेज देने से इनकार कर रही है सरकार'

वायनाड से लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी ने मीडिया से कहा, ‘‘सरकार वायनाड को विशेष पैकेज देने से इनकार कर रही है। हमने गृह मंत्री (अमित शाह) से अनुरोध किया है और प्रधानमंत्री को लिखा है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और वे भी केंद्र से मदद मांग रहे हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों मामलों में केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से पीड़ितों को उनकी उचित सहायता से वंचित कर रही है।

'प्राकृतिक आपदाओं को लेकर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए'

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘भारत के नागरिक होने के नाते सभी समान व्यवहार के पात्र हैं और प्राकृतिक आपदाओं को लेकर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।’’ प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसी मुद्दे पर पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गत बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा था कि विपक्षी दलों को वायनाड की भूस्खलन त्रासदी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस हादसे के बाद सजग और संवेदनशील थी तथा उसने राज्य को पूरी सहायता उपलब्ध कराई। राय ने सदन में ‘आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा था कि विपक्ष को मोदी सरकार के सहयोग को स्वीकार करना चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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