स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने संबोधित करते हुए कहा कि संविधान और हमारा लोकतंत्र हमारे लिए सर्वोपरि है।पिछले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की सकल-घरेलू-उत्पाद-वृद्धि-दर के साथ भारत, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संदेश देते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस, सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं। हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त की तारीख, हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है। औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के दौरान देशवासियों की अनेक पीढ़ियों ने यह सपना देखा था कि एक दिन देश स्वाधीन होगा। देश के हर हिस्से में रहने वाले लोग विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ फेंकने के लिए व्याकुल थे, लेकिन बलवती आशा का भाव था। आशा का वही भाव, स्वतंत्रता के बाद हमारी प्रगति को ऊर्जा देता रहा है। कल, जब हम अपने तिरंगे को सलामी दे रहे होंगे, तब हम उन सभी स्वाधीनता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, जिनके बलिदान के बल पर 78 साल पहले, 15 अगस्त के दिन, भारत ने स्वाधीनता हासिल की थी।
उन्होंने कहा कि भारत-भूमि, विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी कहना सर्वथा उचित है। हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर, हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया, जिनसे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। विभाजन के कारण भयावह हिंसा देखी गई और लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर किए गए। आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह आकांक्षा है कि वर्ष 2047 तक भारत एआई का वैश्विक केंद्र बने। मुर्मू ने इस बात का उल्लेख किया कि डिजिटल युग में भारत में सबसे अधिक प्रगति, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुई है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘लगभग सभी गांवों में 4जी मोबाइल संपर्क उपलब्ध है। शेष कुछ हजार गांवों में भी यह सुविधा शीघ्र ही पहुंचा दी जाएगी। इससे डिजिटल भुगतान तकनीकी को बड़े पैमाने पर अपनाना संभव हो पाया है। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत, कम समय में ही, विश्व का अग्रणी देश बन गया है। इससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को भी बढ़ावा मिला है।’’
मुर्मू के अनुसार, प्रौद्यागिकी विकास का अगला चरण एआई है जो सबके जीवन में अपना स्थान बना चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने देश की एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ‘इंडिया-एआई’ मिशन शुरू किया है। इस मिशन के तहत ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे जो भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। हमारी आकांक्षा है कि वर्ष 2047 तक भारत, एक वैश्विक एआई केंद्र बन जाए। इस दिशा में, सामान्य लोगों के लिए तकनीकी प्रगति का सर्वोत्तम उपयोग और प्रशासन-व्यवस्था में सुधार करके उनके जीवन को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।’’
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम दिए अपने संबोधन में यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से दूरगामी बदलाव किए गए हैं तथा शिक्षा को जीवन-मूल्यों से एवं कौशल को परंपरा के साथ जोड़ा गया है। मुर्मू ने कहा, ‘‘सरकार यह मानती है कि जीवन की बुनियादी सुविधाओं पर, नागरिकों का हक बनता है। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने में प्रगति हो रही है। अपने तरह की विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य-सेवा योजना, ‘आयुष्मान भारत’ के अंतर्गत, विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन प्रयासों के परिणाम-स्वरूप स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, हम क्रांतिकारी बदलाव देख रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस योजना के तहत अब तक 55 करोड़ से अधिक लोगों को सुरक्षा-कवच प्रदान किया जा चुका है। सरकार ने 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना की सुविधा उपलब्ध करा दी है, चाहे उनकी आय कितनी भी हो। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़ी असमानताएं दूर होने से गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों को भी सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।’’
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र किया कि महात्मा गांधी ने भारतीय कारीगरों और शिल्पकारों के खून-पसीने से निर्मित और उनके अतुलनीय कौशल से युक्त उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी की भावना को मजबूत किया था। उन्होंने कहा, ‘‘स्वदेशी का विचार ‘मेक-इन-इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ जैसे राष्ट्रीय प्रयासों को प्रेरित करता रहा है। हम सबको यह संकल्प लेना है कि हम अपने देश में बने उत्पादों को खरीदेंगे और उनका उपयोग करेंगे।’’
