देश

ईरान के राष्ट्रपति व विदेश मंत्री की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत, पीएम मोदी ने जताया दुख

Iranian President Ebrahim Raisi died in helicopter Crash: पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ईरान के राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी के दुखद निधन से गहरा दुख और सदमा लगा है। भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और ईरान के लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। दुख की इस घड़ी में भारत ईरान के साथ खड़ा है।

Image

ईरान के राष्ट्रपति के निधन पर पीएम मोदी ने जताया दुख

Iranian President Ebrahim Raisi died in helicopter Crash: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सोमवार को एक होलिकॉप्टर हादसे में मौत हो गई। हेलिकॉप्टर में रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री व अन्य अधिकारी भी सवार थे। ईरानी मीडिया की ओर से सभी के निधन की पुष्टि की गई है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त किया और कहा कि भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ईरान के राष्ट्रपति डॉ. सैयद इब्राहिम रईसी के दुखद निधन से गहरा दुख और सदमा लगा है। भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और ईरान के लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। दुख की इस घड़ी में भारत ईरान के साथ खड़ा है।

बेल 212 हेलिकॉप्टर से कर रहे थे यात्रा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इब्राहिम रईसी बेल 212 हेलिकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे, जो अमेरिका मेड हेलिकॉप्टर है और बेल टेक्सट्रॉन इंक ने इसका निर्माण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हेलिकॉप्टर 15 सीटर था, जिसमें हादसे के समय चालक दल के साथ कुल 9 लोग सवार थे। बेल 212 को (बेल टू-ट्वेल्व) के ना से भी जाना जाता है। यह मीडियम आकार वाला दो इंजन का हेलिकॉप्टर होता है।

कड़ी मशक्कत के बाद पहुंची रेस्क्यू टीमें

हेलिकॉप्टर क्रैश का पता चलते ही घटनास्थल पर रेस्क्यू टीमों को रवाना किया गया। हालांकि, बारिश और तूफान के बीच बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लगा। वहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए तुर्की ने भी अपने नाइट विजन हेलिकॉप्टर के साथ तीन गाड़ियों को ईरान भेजा था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!