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PM मोदी आज CCS की बैठक में होंगे शामिल, क्यों होती है ये मीटिंग और कौन होता है शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहलगाम में हुए आतंकी हमले की वजह से सऊदी अरब दौरे से बुधवार को दिल्ली लौट आए हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज शाम को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक होने वाली है।

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सीसीएस की आज होगी दिल्ली में बैठक

Photo : PTI

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहलगाम में हुए आतंकी हमले की वजह से सऊदी अरब दौरे से बुधवार को दिल्ली लौट आए हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज शाम को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक होने वाली है।

बता दें कि सीसीएस में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित निर्णय लिए जाते हैं। यह समिति देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करती है और अंतिम फैसला लेने वाली शीर्ष संस्था है। समिति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मुद्दों जैसे- सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर नीतिगत फैसले लेती है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बैठक में सुरक्षा को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। इसके साथ ही सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। वहीं आइए जानते हैं सीसीएस है क्या और इसमें कौन-कौन लोग शामिल होते हैं।

CCS की बैठक में कौन होता है शामिल

बैठक में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), केंद्रीय रक्षा मंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय विदेश मंत्री शामिल होते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए), कैबिनेट सचिव और रक्षा सचिव अक्सर सीसीएस बैठकों में शामिल होते हैं, लेकिन वे स्थायी सदस्य नहीं हैं। बता दें कि पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर मंगलवार को हुए आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी सऊदी अरब से भारत वापस लौट आए हैं। पीएम मोदी वापस आते ही एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने विदेश से लौटते ही एनएसए अजित डोभाल और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की।

पहलगाम हमले में 25 सैलानियों की मौत

जम्मू-कश्मीर में पहलगाम हिल स्टेशन पर मंगलवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम 26 पर्यटकों की मौत हो गई है और कई अन्य पर्यटक एवं स्थानीय लोग घायल हो गए हैं। पूरे विश्व ने इस हमले की निंदा की है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। (IANS इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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