संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की हेट स्पीच पर सख्त गाइडलाइन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
- Reported by: गौरव श्रीवास्तवEdited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 9, 2026, 07:35 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में आज एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा हेट स्पीच के खिलाफ सख्त गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है। याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के हेट स्पीच का उदाहरण देते हुए चिंता जताई गई
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो:PTI)
संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा दिए जा रहे कथित नफरत भरे बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों के एक समूह की ओर से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए हेट स्पीच को लेकर सख्त और प्रभावी गाइडलाइन बनाई जाए, ताकि समाज में विभाजन और नफरत को रोका जा सके।
हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों का विशेष रूप से उल्लेख
याचिका में हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि असम के मुख्यमंत्री ने ‘मिया मुस्लिम’ समुदाय को लेकर हालिया टिप्पणियां कीं, जो गंभीर चिंता का विषय हैं। याचिका के अनुसार, सरमा पहले भी एक समुदाय को सब्जियों की बढ़ती कीमतों, ‘लव जिहाद’ और यहां तक कि ‘फ्लड जिहाद’ जैसे मुद्दों से जोड़ चुके हैं। इसके अलावा, याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के चार से पांच लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की इच्छा जाहिर की थी।
संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बयानों का दिया हवाला
याचिका में अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बयानों का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बार-बार ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा उर्दू भाषा के समर्थकों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र है।
संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ
इसके अलावा, याचिका में कुछ केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मुसलमानों को 'घुसपैठिए' कहे जाने के कथित बयानों का उल्लेख किया गया है। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा नागरिकों से 'इतिहास का बदला लेनेट जैसी अपील का हवाला देते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर स्पष्ट, बाध्यकारी और कारगर दिशानिर्देश जारी करे, ताकि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की भाषा और आचरण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
इन लोगों ने दाखिल की याचिका
जिन लोगों ने याचिका दाखिल की है, उनमें विशेष रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, नजीब हमीद जंग, जॉन दयाल, दया सिंह, अदिति मेहता, सुरेश के. गोयल, अशोक कुमार शर्मा, सुबोध बिहारी लाल, राकेश नैयर और सत्यवीर सिंह के नाम शामिल हैं।
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