नई दिल्ली: नीट परीक्षा को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग करते हुए देश भर के डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड डॉक्टर फेडरेशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा NEET पीजी 2025 की परीक्षा को दो पालियों में कराने, दोनों ही शिफ्ट में अलग अलग प्रश्न पत्र रखने और नतीजे घोषित करते समय नॉर्मलाइजेशन के अस्पष्ट तरीकों में बदलाव की मांग की गई है।
वर्तमान याचिका संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत हजारों मेडिकल एजुकेशन अभ्यर्थियों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाती है। दलील दी गई है कि NEET PG 2025 का कई शिफ्टों में आयोजन में कराए जाने और प्रश्नपत्रों के अलग–अलग होने की वजह से अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं मिल पा रहा है। असमान अवसर संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है जो निष्पक्ष अवसर और आजीविका के अधिकार की गारंटी देता है।
याचिका में की गई मांग
याचिका में ये भी कहा गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा नॉर्मलाइजेशन का जो तरीका NEET के लिए अपनाया गया है वो एम्स दिल्ली से लिया गया है, जो कि पूरी तरह अनुचित है। क्योंकि NEET PG एग्जाम कंटेंट और स्मृति आधारित है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
यूनाइटेड डॉक्टर फ्रंट की तरफ से याचिका दाखिल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि, ‘याचिका का मुख्य उद्देश्य छात्रों के हित की रक्षा करना है। दो पालियों में परीक्षा आयोजित करने का निर्णय न्यायसंगत नहीं है।" इसके अलावा "परीक्षा केंद्रों की संख्या 250 से घटाकर 179 करना छात्रों के साथ अन्याय है। हम उच्चतम न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हैं।"
याचिका के बारे में बताते हुए वकील सत्यम ने कहा कि जब तक मामले का अंतिम निपटारा नहीं होता, नीट पीजी 2025 की प्रक्रिया पर रोक लगाना आवश्यक है ताकि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।" हम याचिका के जरिए मांग करते हैं कि परीक्षा एक ही पाली में, समान स्तर पर और पर्याप्त केंद्रों पर आयोजित की जाए, जिससे सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके।
