Pahalgam Attack: पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकी क्रूरता के बीच रैबिट गर्ल रूबीना ने भी कई पर्यटकों की जान बचाई। 15 साल की रुबीना अपने खरगोश को लेकर बैसरन के मैदान में घूम रही थी कि अचानक से गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी और वहां देखते ही देखते अफरातफरी मच गई। लेकिन रूबीना ने अपनी जान की परवाह किए बगैर बदहवास दौड़ रहे सैलानियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुट गई। रूबीना ने ना सिर्फ कई सैलानियों की मदद की बल्कि कई सैलानियों को अपने घर में पनाह भी दी और बदहवास हालत में भाग रहे भूले भटके सैलानियों को एम्बुलेंस में भेजकर अस्पताल भी पहुंचाया।

Pahalgam Attack
रूबीना बैसरन घाटी से 20 मिनट की दूरी पर रहती है। पिता मजदूरी करते हैं। और खुद रूबीना खरगोश हाथ में लेकर सैलानियों के साथ तस्वीर खिंचाती है, जिसके बदले कोई सैलानी 20₹ देता है तो कोई 50₹। इस तरह रूबीना को दिन भर में 500 से 600₹ मिल जाते हैं। हमले के दिन सैलानियों की जान बचने में रूबीना अकेली नहीं थी बल्कि उसके साथ उसकी मां भी थी जिसने कई सैलानियों को पानी पिलाकर शांत कराया और अस्पताल की कर भेजा।
सज्जाद अहमद भट्ट (शॉल सेलर) ने पेश की इंसानियत की मिसाल
जम्मू कश्मीर पुलिस ने मुझे बुलाया था और उन्होंने मेरी तारीफ की कि आपने बहुत अच्छा काम किया और लोगों की जान बचाई। उन्होंने कहा कि अपने दिखाया कि दुनिया में अभी भी आप जैसे लोग जिंदा हैं और आपने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। उस वक्त वहां पर कयामत का मंजर था जिसको हम कभी नहीं भूलेंगे और ना कभी देखा था वहां पर लोग रो रहे थे बेसुध पड़े हुए थे। सैलानी मुझसे कह रहे थे कि हमें किसी भी तरह यहां से बचा लो। जब मैं वहां पहुंचा तो लोग जख्मी पड़े हुए थे। सैलानी डरे हुए सहमे हुए थे कई जख्मी थे उन्हें हमने अस्पताल तक पहुंचा और जो भी मिला मुझे मैंने कंधे पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया। मैंने इंसानियत के नाते लोगों की वहां पर मदद की क्योंकि वहां पर भी सब इंसान ही थे। गलत काम का गलत नतीजा होता है। जो जहर खाता है वह मर जाता है। जिसने भी यह काम किया, गलत किया उनको सजा मिलनी चाहिए। हम एक दूसरे के दिलों में नफरत फैलाएंगे तो देश कैसे चलेगा हमें भी अपने हिंदुस्तान को आगे बढ़ाना है।
