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Pahalgam Attack: रैबिट गर्ल रूबीना और शॉल सेलर सज्जाद ने बचाई पर्यटकों की जान, बताई पूरी कहानी

Pahalgam Attack: बैसरन घाटी में आतंकी क्रूरता के बीच रैबिट गर्ल रूबीना ने भी कई पर्यटकों की जान बचाई। रूबीना बैसरन घाटी से 20 मिनट की दूरी पर रहती है। पिता मजदूरी करते हैं। और खुद रूबीना खरगोश हाथ में लेकर सैलानियों के साथ तस्वीर खिंचाती है।

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हाथ में खरगोश लिए रुबीना और शॉल सेलर सज्जाद ने बचाई पर्यटकों की जान

Photo : Twitter

Pahalgam Attack: पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकी क्रूरता के बीच रैबिट गर्ल रूबीना ने भी कई पर्यटकों की जान बचाई। 15 साल की रुबीना अपने खरगोश को लेकर बैसरन के मैदान में घूम रही थी कि अचानक से गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी और वहां देखते ही देखते अफरातफरी मच गई। लेकिन रूबीना ने अपनी जान की परवाह किए बगैर बदहवास दौड़ रहे सैलानियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुट गई। रूबीना ने ना सिर्फ कई सैलानियों की मदद की बल्कि कई सैलानियों को अपने घर में पनाह भी दी और बदहवास हालत में भाग रहे भूले भटके सैलानियों को एम्बुलेंस में भेजकर अस्पताल भी पहुंचाया।

Pahalgam Attack

Pahalgam Attack

रूबीना बैसरन घाटी से 20 मिनट की दूरी पर रहती है। पिता मजदूरी करते हैं। और खुद रूबीना खरगोश हाथ में लेकर सैलानियों के साथ तस्वीर खिंचाती है, जिसके बदले कोई सैलानी 20₹ देता है तो कोई 50₹। इस तरह रूबीना को दिन भर में 500 से 600₹ मिल जाते हैं। हमले के दिन सैलानियों की जान बचने में रूबीना अकेली नहीं थी बल्कि उसके साथ उसकी मां भी थी जिसने कई सैलानियों को पानी पिलाकर शांत कराया और अस्पताल की कर भेजा।

सज्जाद अहमद भट्ट (शॉल सेलर) ने पेश की इंसानियत की मिसाल

जम्मू कश्मीर पुलिस ने मुझे बुलाया था और उन्होंने मेरी तारीफ की कि आपने बहुत अच्छा काम किया और लोगों की जान बचाई। उन्होंने कहा कि अपने दिखाया कि दुनिया में अभी भी आप जैसे लोग जिंदा हैं और आपने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। उस वक्त वहां पर कयामत का मंजर था जिसको हम कभी नहीं भूलेंगे और ना कभी देखा था वहां पर लोग रो रहे थे बेसुध पड़े हुए थे। सैलानी मुझसे कह रहे थे कि हमें किसी भी तरह यहां से बचा लो। जब मैं वहां पहुंचा तो लोग जख्मी पड़े हुए थे। सैलानी डरे हुए सहमे हुए थे कई जख्मी थे उन्हें हमने अस्पताल तक पहुंचा और जो भी मिला मुझे मैंने कंधे पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया। मैंने इंसानियत के नाते लोगों की वहां पर मदद की क्योंकि वहां पर भी सब इंसान ही थे। गलत काम का गलत नतीजा होता है। जो जहर खाता है वह मर जाता है। जिसने भी यह काम किया, गलत किया उनको सजा मिलनी चाहिए। हम एक दूसरे के दिलों में नफरत फैलाएंगे तो देश कैसे चलेगा हमें भी अपने हिंदुस्तान को आगे बढ़ाना है।

Shashank Shekhar Mishra
Shashank Shekhar Mishraauthor

शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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