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भारत के 'धान संरक्षक' चेरुवायल रमन का निधन, 60 से ज्यादा किस्में बचाने पर मिला था 'पद्मश्री'

Cheruvayal Raman Passes Away: पद्मश्री विजेता और देश के प्रसिद्ध 'धान संरक्षक' चेरुवायल रमन का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन से जैविक खेती और देशी बीज संरक्षण के क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है।

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भारत के 'धान संरक्षक' का निधन (फोटो साभार- @INCIndia)

Cheruvayal Raman Passes Away: देश के प्रसिद्ध बीज संरक्षक और 'धान संरक्षक' के नाम से मशहूर चेरुवायल रमन का बुधवार को निधन हो गया। केरल के रहने वाले चेरुवायल 74 साल के थे। दिल की बीमारी के चलते कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से जैविक खेती और देशी बीज संरक्षण के क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है। चेरुवायल रमन को लोग प्यार से 'नेल्लाचन' और 'रमेट्टन' कहते थे। उन्हें भारत का 'जीवित धान जीन बैंक' भी कहा जाता था।

60 से ज्यादा देशी धान की किस्मों का संरक्षण

वायनाड जिले के कम्मना गांव में 1952 में कुरिचिया आदिवासी समुदाय में जन्मे रमन का खेती से नाता बचपन से ही जुड़ गया था। अपने मामा से खेती के गुर सीखने के बाद 1989 में मामा के निधन के बाद पूरे परिवारिक खेत की जिम्मेदारी उन पर आ गई। रमन ने देखा कि आधुनिक और व्यावसायिक खेती के कारण वायनाड की 160 देशी धान किस्मों में से आधी से ज्यादा लुप्त हो गई हैं। इस संकट को देखते हुए उन्होंने साल 2000 में देशी धान को बचाने का बीड़ा उठाया। अपने तीन एकड़ के छोटे से खेत को उन्होंने जैव विविधता का अभयारण्य बना दिया। उन्होंने अकेले दम पर 60 से ज्यादा दुर्लभ देशी धान की किस्मों को संरक्षित किया।

जैविक खेती के लिए मिला पद्मश्री

इसमें थोंडी, मन्नुवेलियन, कनाली, चेट्टुवेलियन, पलवेलियन, गंधकसाला, जीरकासला और कायमा जैसी कई दुर्लभ और खुशबूदार किस्में शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने विलुप्त होने से बचाया। खास बात यह थी कि जब ज्यादातर किसान हाइब्रिड बीजों की ओर भाग रहे थे, तब रमन पूरी तरह जैविक खेती पर अड़े रहे। उनकी सबसे बड़ी पहचान उनका निस्वार्थ भाव था। वह किसी भी किसान को जो जैविक खेती करना चाहता था, उसे मुफ्त में बीज दे देते थे। बदले में सिर्फ इतना कहते थे कि फसल के बाद उतना ही बीज लौटा देना, ताकि यह चक्र चलता रहे। उनके इस असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने 2023 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उन्हें नेशनल प्लांट जीनोम सेवीयर अवॉर्ड और केरल सरकार का कर्षक ज्योति पुरस्कार भी मिल चुका है। पिछले साल केरल कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' नियुक्त किया था।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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