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Operation Kaveri: सूडान से अब तक निकाले गए 2400 भारतीय, 300 अन्य यात्रियों को लेकर INS Sumedha रवाना

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 29, 2023, 08:36 AM IST

Operation Kaveri: सूडान में जंग छिड़ने के बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन कावेरी शुरू किया था। इस ऑपरेशन के तहत संकटग्रस्त देश से लगातार भारतीयों को निकाला जा रहा है। अब तक करीब 2400 भारतीयों को सूडान से सुरक्षित निकाला गया है।

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भारतीयों को लेकर सूडान से रवाना हुआ INS Sumedha (@MEAIndia)

Photo : Twitter

Operation Kaveri: युद्धग्रस्त सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने का काम जोर शोर से चल रहा है। भारतीय सरकार ने इस निकासी अभियान को ऑपरेशन कावेरी नाम दिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक सूडान से 24 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बता दें, युद्ध के समय करीब 3000 भारतीय सूडान के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए थे।

शनिवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ट्वीट के माध्मय से बताया कि करीब 2400 भारतीयों को सूडान से निकाला गया है। उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन कावेरी के तहत भारतीयों का 13वां जत्था निकाला गया है। आईएनएस सुमेधा सूडान बंदरगाहर से 300 यात्रियों को लेकर जेद्दाह के लिए रवाना हुआ है।

कैसे पड़ा ऑपरेशन कावेरी नामएक रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान में फंसे ज्यादातर भारतीय दक्षिणी भारत से हैं। वहीं, कावेरी दक्षिणी भारत मे बहने वाली प्रमुख नदियों में से गए है। दक्षिण भारत के लोग इस नदी को कावेरीअम्मा कहकर बुलते हैं और इसकी पूजा करते हैं। कहा जाता है कि यह नदी सभी बाधाओं को पार करते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचती है। यही कारण है कि सूडान में फंसे भारतीयों के निकासी अभियान को भी ऑपरेशन कावेरी नाम दिया गया है, भारत सरकार का यह अभियान विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन की देखरेख में चलाया जा रहा है।

सूडान में क्यों छिड़ी है जंग

सूडान में इन दिनों सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच संघर्ष चल रहा है। दोनों सेनओं के प्रमुख के बीच वर्चस्व की लड़ाई है, दोनों सूडान पर अपना अधिकार चाहते हैं। कहा जाता है कि एक समय दोनों सैन्य अधिकारियों ने साथ में काम किया और देश का तख्तापलट करने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, अब दोनों के बीच जंग छिड़ी हुई है, इसमें करीब 400 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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