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'हो आए अयोध्या? दर्शन करने नहीं गए ना? जाते भी कैसे...', ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर क्यों कसा तंज फिर दी ये नसीहत

अयोध्या दौरे के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर ओम प्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला। राम मंदिर में दर्शन नहीं करने को लेकर सवाल उठाते हुए राजभर ने उनकी धार्मिक आस्था और वोट बैंक की राजनीति पर निशाना साधा।

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ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर कसा तंज। op rajbhar x handle

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या को लेकर सियासी बयानबाजी तल्ख होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और राम मंदिर में दर्शन नहीं करने को लेकर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर (OP Rajbhar) ने उन पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव की धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या तो पहुंचे, लेकिन रामलला के दर्शन करने नहीं गए।

‘अयोध्या गए, लेकिन दर्शन करने नहीं गए’

ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, ‘हो आए अयोध्या? दर्शन करने नहीं गए ना?’ इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव मंदिर जाते भी कैसे, क्योंकि ऐसा करने से ‘दाढ़ी-टोपी रूठ जाती’। राजभर ने इस टिप्पणी के जरिए सपा प्रमुख पर अल्पसंख्यक मतदाताओं को नाराज करने के डर से मंदिर नहीं जाने का आरोप लगाया।

राजभर ने अखिलेश यादव से यह भी सवाल किया कि अयोध्या की सड़कों पर पहुंचने के दौरान क्या उन्हें कारसेवकों की चीखें याद नहीं आईं। उन्होंने 1990 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव को उनके पिता की सरकार के फैसले की याद दिलाई। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को पश्चाताप करना चाहिए और उम्मीद जताई कि भगवान राम उन्हें माफ कर देंगे।

‘आस्था है तो राजनीतिक समीकरणों के बंधक मत बनिए’

सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की धार्मिक आस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनकी आस्था है तो उन्हें राजनीतिक समीकरणों के दबाव में नहीं रहना चाहिए। वहीं, अगर उनकी आस्था नहीं है तो उन्हें खुलकर खुद को नास्तिक कहना चाहिए।

राजभर ने लिखा कि बीच का रास्ता अपनाने से अखिलेश यादव न तो पूरी तरह 80 प्रतिशत मतदाताओं के रहेंगे और न ही 20 प्रतिशत के। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक मतदाताओं के संदर्भ में की गई है। राजभर का आरोप है कि सपा प्रमुख धार्मिक मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर राजनीति कर रहे हैं।

प्रसाद ग्रहण करते हुए तस्वीर पर भी कसा तंज

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की भोजन-प्रसाद ग्रहण करते हुए सामने आई तस्वीर को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तस्वीर देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ, क्योंकि उनके मुताबिक अखिलेश यादव इफ्तार के दौरान टोपी पहनकर मुस्कुराते हुए नजर आते हैं, जबकि प्रसाद ग्रहण करते समय वह असहज दिखाई दे रहे थे। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि अखिलेश यादव प्रसाद ग्रहण करने नहीं, बल्कि ‘वोट की भूख मिटाने’ बैठे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अखिलेश यादव को डर है कि अगर उनकी इफ्तार वाली मुस्कान दिखाई दे गई तो मौलाना नाराज हो जाएंगे। ये टिप्पणियां राजभर के राजनीतिक आरोप हैं।

पोस्ट के आखिर में राजभर ने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव की अंतरात्मा जागेगी और वह किसी दिन भगवान राम तथा हनुमान के दरबार में शीश झुकाकर माफी मांगेंगे। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन ‘जय श्री राम, जय हनुमान’ के नारे के साथ किया।

अयोध्या दौरे के बाद बढ़ी सियासी बयानबाजी

अखिलेश यादव गुरुवार को अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है तो उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि सैफई में केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद वह पार्टी नेताओं के साथ राम मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे।

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के बाद भाजपा और एनडीए के नेताओं की ओर से उनकी धार्मिक आस्था और मंदिर नहीं जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर, धार्मिक प्रतीकों और मतदाताओं के समीकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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