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Medical की तैयारी करने वालों के लिए खुशखबरीः बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल भी खोल सकेंगे मेडिकल कॉलेज, केंद्र की पहल

  • Authored by: भावना किशोर
  • Updated Mar 13, 2023, 07:37 PM IST

हालांकि, भारत में प्राइवेट कालेज में सरकारी कोटे की सीटें होती हैं लेकिन उनमें एडमिशन इतना आसान नहीं है और मैनेजमेंट कोटे की सीटों की फीस बहुत ज्यादा है।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : iStock

भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीटों की मारामारी को खत्म करने के लिए देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक नई पहल की है। देश के बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल्स के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में मीटिंग की है। इस मीटिंग में देश 62 अस्पतालों ने हिस्सा लिया था। देश से कई छात्र सरकारी मेडिकल कालेज में सीटें ना मिलने और प्राइवेट मेडिकल कालेज की ज्यादा फीस या वहां पढ़ाई का अच्छा इंतजाम ना होने की वजह से हर साल बाहर जाने को मजबूर हो जाते हैं। लिहाजा देश में ही किफायती रेट्स पर मेडिकल की पढ़ाई हो सके, इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों से रिक्वेस्ट की जा रही है।

इस मीटिंग में जसलोक, ब्रिज कैंडी, कोकिला बेन, सत्य साई हॉस्पिटल्स,अपोलो, मेदांता और अमृता अस्पताल जैसे अस्पताल शामिल हुए। करीब 10 से 12 अस्पतालों ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है।

आखिर वो क्या वजह है कि सरकार ने ये कदम उठाया है?

  • विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई आसान और किफायती है
  • NEET का एंट्रेंस मुश्किल
  • नीट के लिए 8 लाख स्टूडेंट करते हैं एप्लाई
  • कुल मेडिकल सीटें 1 लाख से भी कम
  • सरकारी मेडिकल सीटें 50 हज़ार से कुछ ज्यादा
हर साल भारत के कई स्टूडेंट्स चीन रुस और यूक्रेन MBBS की पढ़ाई के लिए चले जाते हैं क्योंकि भारत के प्राइवेट मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की फीस और एडमिशन की डोनेशन मिलाकर खर्च 50 लाख से 1 करोड़ तक भी आ सकता है। जबकि यूक्रेन में रहना और पढ़ाई मिलाकर ये काम 35 लाख में हो सकता है। हालांकि भारत में प्राइवेट कालेज में सरकारी कोटे की सीटें होती हैं लेकिन उनमें एडमिशन इतना आसान नहीं है और मैनेजमेंट कोटे की सीटों की फीस बहुत ज्यादा है। केंद्र सरकार के इस कदम से भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स को आने वाले सालों में राहत हो सकती है।
भावना किशोर
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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