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'पेट्रोल में ज्यादा इथेनॉल वाला कर्नाटक का दावा गलत' पेट्रोलियम मंत्रालय बोला-टेस्ट में नहीं मिला सबूत

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य के कुछ रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले पेट्रोल में 26-31% तक इथेनॉल है।

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प्रतीकात्मक फोटो

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि राज्य में बिकने वाले पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक है। मंत्रालय का कहना है कि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा किए गए टेस्ट से पता चला है कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने के मानक का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य के कुछ रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले पेट्रोल में 26-31% तक इथेनॉल है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक सहित पूरे देश में सप्लाई होने वाला ईंधन, तय किए गए 20% इथेनॉल-ब्लेंडिंग मानक के अनुरूप है।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs)-इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)-ने टेस्ट किए हैं, जिनमें तय ब्लेंडिंग मानकों से किसी भी तरह की कोई विसंगति नहीं पाई गई है।

मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार द्वारा अक्टूबर 2026 की एक जांच प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए सैंपलिंग और टेस्टिंग तरीकों पर भी सवाल उठाए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन जांच नतीजों की, तय कानूनी और तकनीकी मानकों के आधार पर स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती। इन तीनों कंपनियों ने कहा कि उनके देशव्यापी नेटवर्क के जरिए सप्लाई किया जाने वाला E20 पेट्रोल, 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (BIS) के IS 17021 मानक के अनुरूप है।मंत्रालय ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों ने सैंपलिंग के पूरे रिकॉर्ड, आउटलेट-वार लैब रिपोर्ट और स्वतंत्र टेस्टिंग के लिए सैंपल के दूसरे हिस्से (counterpart samples) तक पहुंच की मांग की है।

यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या कर्नाटक की जांच प्रक्रिया में 'मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल (सप्लाई, वितरण और कदाचार की रोकथाम का विनियमन) आदेश, 2005' और 'मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (MDG) 2024' के तहत तय सैंपलिंग और टेस्टिंग नियमों का पालन किया गया था या नहीं। मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों के तहत एक-लीटर के छह सैंपल लिए जाने चाहिए। इनमें से दो सैंपल डीलर को दिए जाते हैं, दो सैंपल तेल कंपनी या विभाग अपने पास रखता है, और दो सैंपल एक अधिकृत लैब में भेजे जाते हैं। सैंपल के लेबल पर सभी संबंधित पक्षों के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए, और टेस्ट के नतीजे तय समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी को बता दिए जाने चाहिए। कंपनियों ने बताया कि सितंबर 2026 की एक जांच प्रक्रिया के दौरान लिए गए नमूनों को 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' के जरिए तय की गई OMC प्रयोगशालाओं में भेजा गया और वहां उनकी गुणवत्ता के तय मानकों के आधार पर जांच की गई।

'किसी थर्ड-पार्टी प्रयोगशाला द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल क्यों'

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद अक्टूबर में हुई जांच प्रक्रिया के दौरान लिए गए नमूने, कथित तौर पर OMC प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना लिए गए थे। कंपनियों ने बताया कि 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' से बार-बार मांगने के बावजूद, उन्हें न तो 'रिटेंशन सैंपल' (सुरक्षित रखे गए नमूने) मिले, न ही आउटलेट-वार पूरी जानकारी या प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिली।OMC ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि 'कंट्रोल ऑर्डर' में बताई गई प्रयोगशाला के बजाय, किसी थर्ड-पार्टी प्रयोगशाला द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल क्यों किया गया।

बयान में कहा गया है कि कर्नाटक की प्रेस विज्ञप्ति में जिन प्रमाणपत्रों का जिक्र है, उनमें 'गैस क्रोमैटोग्राफी' के जरिए मापी गई इथेनॉल की मात्रा तो बताई गई है, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इसके लिए किस टेस्ट स्टैंडर्ड, डाइल्यूशन प्रक्रिया या रेफरेंस मटेरियल का इस्तेमाल किया गया।

मंत्रालय ने 'सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी' (CHT) के साथ मिलकर की गई एक अलग गुणवत्ता-निगरानी प्रक्रिया का हवाला दिया। इसके तहत 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से E20 (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के 893 नमूने लिए गए और उनकी जांच की गई। मंत्रालय के अनुसार, IOC, BPCL और HPCL के डिपो और रिटेल आउटलेट से लिए गए इन सभी 893 नमूनों में इथेनॉल की मात्रा तय सीमा (19-21 प्रतिशत) के भीतर पाई गई।

कर्नाटक में, अलग-अलग जगहों से लिए गए और तीनों OMC से जुड़े सभी 56 नमूनों में 19-20 प्रतिशत इथेनॉल पाया गया, जिसका औसत 19.30 प्रतिशत रहा।सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों के तहत इथेनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना) को बढ़ावा दिया है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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