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भारत आकर देखें पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में हैं मुस्लिम, निर्मला सीतारमण की पश्चिम देशों को खरी-खरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 11, 2023, 06:58 AM IST

Nirmala Sitharaman on Muslims in India: निर्मला सीतारमण ने कहा, लोगोंं को भारत आकर यहां की स्थिति देखनी चाहिए। भारत में मुस्लिमों की स्थिति पाकिस्तान से बेहतर है। यहां मुस्लिम समाज के लोग व्यापार कर रहे हैं। उनके बच्चे शिक्षित हो रहे हैं। जबकि, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद खराब है।

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारणम

Photo : ANI

Nirmala Sitharaman: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण ने भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर पश्चिम देशों को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने नकारात्मक पश्चिमी धारणा का जवाब देते हुए कहा भारत में रहने वाले मुस्लिम समाज की स्थिति पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिमों से बेहतर है।सीतारमण रविवार को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लेने और जी20 के तहत दूसरी वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए वाशिंगटन पहुंचीं थीं।

सोमवार को पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) में भारत में निवेश और पूंजी प्रवाह को प्रभावित करने वाली धारणाओं पर सीतारमण ने कहा, मुझे लगता है कि इसका उत्तर उन निवेशकों के पास है जो भारत आ रहे हैं। एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो निवेश प्राप्त करने में रुचि रखता है, मैं केवल यह कहूंगी कि भारत में क्या हो रहा है, यह देखने के लिए आपको भारत आना चाहिए, न कि उन लोगों की धारणाओं को सुनना चाहिए जो जमीनी हकीकत नहीं जानते हैं और सिर्फ रिपोर्ट तैयार करते हैं।

भारत में दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुस्लिम

पीआईआईई के अध्यक्ष एडम एस पोसेन को जवाब देते हुए वित्तमंत्री ने कहा, दुनिया में भारत में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है और उनकी जनसंख्या केवल संख्या में बढ़ रही है। यदि यह धारणा है कि उनका जीवन कठिन बना दिया गया है। मैं पूछती हूं कि अगर ऐसा है तो क्या यह कहना सही होगा कि भारत में 947 की तुलना मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।

पाकिस्तान को लताड़ा

निर्मला सीतारमण ने इस दौरान पाकिस्तान को भी खूब खरीखोटी सुनाई। उन्होंने कहा, खुद को एक इस्लामिक देश घोषित करने के बावजूद पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रहा। पाकिस्तान में हर अल्पसंख्यक समूह की संख्या में कमी आई है और यहां तक कि कुछ मुस्लिम संप्रदायों का भी सफाया हो गया है। उन्होंने कहा, मुहाजिरों, शिया और हर दूसरे समूह के खिलाफ हिंसा होती है। जबकि भारत में आप पाएंगे कि मुसलमानों का हर वर्ग अपना व्यवसाय कर रहा है, उनके बच्चे शिक्षित हो रहे हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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