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यूपी में काम कर गया योगी का डंडा; NCRB रिपोर्ट में दावा- देशभर में अपराध घटे; 96.6% पॉक्सो मामलों में आरोपी परिचित

Uttar Pradesh law and order: महिलाओं के विरुद्ध अपराध में पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई क्योंकि वर्ष 2024 में 4.41 लाख मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 4.48 लाख थी।

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यूपी में काम कर गया योगी का डंडा; NCRB रिपोर्ट में दावा- देशभर में अपराध घटे; 96.6% पॉक्सो मामलों में आरोपी परिचित

NCRB report UP: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वर्ष 2024 के लिए जारी नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। जहां राष्ट्रीय अपराध दर 252.3 थी, वहीं उत्तर प्रदेश में अपराध दर काफी कम 180.2 दर्ज की गई। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या उप्र में निवास करती है।

किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए अपराध दर सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर के रूप में परिभाषित किया जाता है।

हत्या, दुष्कर्म...पढ़ें- यूपी के ये आंकड़े

बयान के मुताबिक हत्या के मामलों में देश में उत्तर प्रदेश का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है।

बयान के अनुसार दुष्कर्म के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है।

बयान में कहा गया कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है।

देशभर में अपराध में छह फीसदी की कमी आई

जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देशभर में 2024 में 58.85 लाख अपराध के मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 के 62.41 लाख मामलों की तुलना में छह प्रतिशत कम है। अपराध दर का आशय प्रति लाख जनसंख्या पर दर्ज अपराध के मामलों की संख्या से है। अपराध दर वर्ष 2023 में 448.3 थी जो घटकर 2024 में 418.9 रह गई।

आंकड़ों से पता चला कि भारतीय दंड संहिता की धारा 325, 326 और 329-335 के तहत ’चोट’ श्रेणी में दर्ज मामलों में 30.58 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। ’चोट’ श्रेणी के तहत दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2023 में 6.36 लाख से अधिक थी जो वर्ष 2024 में घटकर 4.41 लाख से कुछ अधिक रह गई।

हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ’चोट या गंभीर चोट’ के मामलों में गिरावट का कारण भारतीय न्याय संहिता में 2023 में किए गए बदलाव हो सकते हैं, जिसने भारतीय दंड संहिता का स्थान लिया है। इन संशोधनों के तहत इन धाराओं को मिला दिया गया है और साधारण ’चोट’ को संज्ञेय अपराध नहीं बनाया गया है।

देश में हत्या और महिलाओं से अपराध के आंकड़े

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 के दौरान हत्या के कुल 27,049 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाते हैं। इन अपराधों के पीछे मुख्य कारण ’विवाद’ था, इसके बाद ’व्यक्तिगत प्रतिशोध या शत्रुता’ और ’लाभ’ का स्थान रहा।

महिलाओं के विरुद्ध अपराध में पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई क्योंकि वर्ष 2024 में 4.41 लाख मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 4.48 लाख थी।

आंकड़ों के अनुसार 'पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' ऐसे अपराधों का प्रमुख कारण था, इसके बाद अपहरण, नाबालिगों के खिलाफ अपराध और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उन पर हमला जैसे अपराध थे।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'प्रति लाख महिला आबादी पर दर्ज अपराध की दर 2024 में 64.6 थी, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 66.2 था।' रिपोर्ट में बताया गया है कि अनुसूचित जाति (एससी) के खिलाफ अपराध के कुल 55,698 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 की तुलना में 3.6 प्रतिशत की कमी दर्शाते हैं। वर्ष 2023 में 57,789 मामले दर्ज किए गए थे। अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में भी 23.1 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि 2024 में कुल 9,966 मामले दर्ज किए गए जबकि 2023 में दर्ज मामलों की संख्या 12,960 थी।

नाबालिगों से यौन शोषण करने वाले होते हैं परिचित

नाबालिगों के यौन शोषण के 44,126 मामलों में से 96.6 प्रतिशत मामलों में करीबी परिचित ही मुख्य अपराधी के रूप में सामने आए हैं। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई। एनसीआरबी द्वारा जारी अपनी रिपोर्ट ’भारत में अपराध 2024’ में बताया गया है कि वर्ष के दौरान देश भर में नाबालिगों पर यौन हमले से संबंधित "लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम" (पॉक्सो) की धारा चार और छह के तहत कुल 44,126 मामले दर्ज किए गए हैं।

नवीनतम एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार, ये आंकड़े एक भयावह तस्वीर पेश करते हैं क्योंकि इस श्रेणी में आने वाले कुल 44,126 मामलों में से 42,634 (लगभग 96.6 प्रतिशत) मामलों में करीबी परिचित प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आए हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि 3,658 मामलों में परिवार के सदस्य शामिल थे, जबकि 16,668 मामलों में पारिवारिक मित्र, पड़ोसी, नियोक्ता या अन्य परिचित व्यक्तियों का नाम लिया गया था।

इनमें से सबसे अधिक मामले दोस्तों, ऑनलाइन दोस्तों या सह-जीवन साथी द्वारा विवाह का झांसा देकर किए गए थे, जिनकी संख्या 22,308 थी।

जिन मामलों में अपराधी अज्ञात था या उसकी पहचान नहीं हो पाई, उनकी संख्या मात्र 1,492 थी, जो कुल मामलों का 3.4 प्रतिशत है।

सबसे ज्यादा पॉक्सो के मामले तमिलनाडु में

राज्यों में तमिलनाडु में सबसे अधिक 5,320 पॉक्सो के मामले दर्ज किए गए, उसके बाद महाराष्ट्र में 4,829 और मध्य प्रदेश में 3,721 मामले दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश 3,671 मामलों के साथ अगले स्थान पर रहा।

केंद्र शासित प्रदेशों में, दिल्ली में सबसे अधिक 1,038 मामले दर्ज किए गए, उसके बाद जम्मू-कश्मीर में 228 और पुडुचेरी में 82 मामले दर्ज किए गए। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 77 मामले सामने आए।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, सिक्किम, उत्तराखंड, त्रिपुरा और चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लक्षद्वीप, लद्दाख और पुडुचेरी सहित कई केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों में 100 प्रतिशत मामले ज्ञात अपराधियों से जुड़े हुए पाए गए।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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