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'एक भी गाड़ी में दिक्कत आई हो तो नाम बताएं', एथनॉल मिश्रित पेट्रोल विवाद पर बोले गडकरी

गडकरी ने यहां 'विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल आदि) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है। इसके कारण ईंधन आयात पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है।

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केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी।

Photo : PTI

Ethanol Mixed Petrol: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसी एक भी कार का नाम बताएं जिसमें इस ईंधन के कारण कोई समस्या आई हो। ई-20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित ईंधन बिक्री की अनिवार्यता को लेकर आलोचना और गाड़ियों की माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच उन्होंने यह बात कही। गडकरी ने यहां 'विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल आदि) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है। इसके कारण ईंधन आयात पर सालाना 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है, इसलिए देश की प्रगति के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना बहुत जरूरी है।

गलत बातें फैलाई जा रही हैं-गडकरी

उन्होंने कहा, 'ई20 पेट्रोल के कारण किसी कार में समस्या आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसमें ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई समस्या आई हो? बस एक का नाम बताइए।’ गडकरी ने कहा, '...ज़्यादा एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लागू करने के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। पैसा देकर यह अभियान चलाया जा रहा है।’ भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है।

अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे

भारत में वाहन मालिकों के पास पेट्रोल पंप पर अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता, जबकि ब्राजील में ग्राहकों को अलग-अलग कीमतों वाले ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है। ब्राजील के कानून के तहत, अधिक एथनॉल वाले मिश्रण के लिए कीमत में छूट देनी होती है। इस आरोप पर कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।

किसानों को 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई

उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की अधिकता है इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। गडकरी ने कहा, 'जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया, तो मक्के की बाजार कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।’ उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए।’

हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अधिक एथनॉल मिश्रित और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है ताकि सभी तरह के वाहनों के लिए ’फ्लेक्स-फ्यूल’ और पूरी तरह से जैव ईंधन से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो सके। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद ई85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथनॉल) और ई100 (जिससे वाहन लगभग शुद्ध एथनॉल पर चल सकेंगे) जैसे ईंधनों के साथ-साथ बी100 बायो-डीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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