RBI Monetary Policy October 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी स्टेटमेंट जारी करते हुए साफ कहा कि रेट कट का दौर खत्म हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने पॉलिसी पर रुख को कड़ा (हॉकिश) करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में रेट हाइक से इन्कार नहीं किया जा सकता है। पूरे पॉलिसी स्टेटमेंट सबकी नजर इस पर ही टिकी थी। लेकिन, इसके अलावा भी उन्होंने इकोनॉमी, महंगाई और रुपये से जुड़ी कई अहम बातें सामने रखी हैं, जो आने वाले दिनों में सीधे तौर पर देश के आर्थिक हालात, आपकी जेब और शेयर बाजार पर असर डालने वाली हैं।
RBI गवर्नर ने ग्लोबल इकोनॉमिक हालात और ग्रोथ को लेकर कहा, सितंबर में पश्चिम एशिया संघर्ष के अचानक फिर से तेज होने और उसके नतीजतन वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अस्थिरता ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटिमेंट को कमजोर किया है। इसने कैपिटल और फाइनेंशियल मार्केट्स में अस्थिरता बढ़ाई है। हालांकि वैश्विक आर्थिक वृद्धि अब भी रेजिलिएंट हुई है, लेकिन 2026 में इसके पिछले वर्ष की तुलना में धीमा होने का अनुमान है।
इसके साथ ही उन्होंने एनर्जी प्राइस में बढ़ोतरी और खाद्य कीमतों में वृद्धि को वैश्विक महंगाई बढ़ाने वाला जोखिम बताते हुए कहा कि इसकी वजह से ही प्रमुख केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने ट्रंप के टैरिफ फैसलों, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर को भी ग्लोबल मार्केट्स के लिए चुनौतीपूर्ण बताया। वहीं, शेयर बाजारों में AI शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर जारी अनिश्चितता को भी ग्लोबल इकोनॉमी के लिए डाउनसाइड रिस्क करार दिया।
रेपो रेट पर क्या कहा?
Monetary Policy Committee के फैसले पर उन्होंने कहा, MPC बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) पर विचार किया गया। मौजूदा दौर में उभरते हुए मैक्रो इकोनॉमिक और फाइनेंशियल डेवलपमेंट और आउटलुक के आधार पर बाद MPC ने सर्वसम्मति से लिक्विडिट एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के तहत पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया है। इसके नतीजतन SDF, MSF और बैंक रेट में भी बदलाव हुआ है।
- स्टौंडिंग डिपोजिट फैसिलिटी (SDF) रेट : 5.25 प्रतिशत
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट : 5.75 प्रतिशत
- बैंक रेट : 5.75 प्रतिशत
इसके साथ ही उन्होंने कहा, MPC ने पॉलिसी पर अपना रुख (Policy Stance) न्यूट्रल से बदलकर नियंत्रित कठोरता (Calibrated Tightening) करने का भी फैसला किया। इन फैसलों के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, MPC ने माना है कि जियो पॉलिटिक बदलावों के कारण वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। इस स्थिति में पॉलिसी रेट को दुरुस्त करना जरूरी है। उनके इस पॉलिसी स्टेटमेंट से तमाम ब्रोकरेज और एनालिस्ट की तरफ से मौजूदा वित्त वर्ष में 0.75% रेट हाइक का अनुमान सही साबित होता दिख रहा है। पॉलिसी स्टेटमेंट साफ तौर पर संकेत दे रहा है कि अगली दो तिमाही में भी रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दर में बढ़ोतरी की जा सकती है।
इकोनॉमी के सामने क्या हैं चुनौतियां?
RBI Governor ने एक तरफ भारतीय इकोनॉमी की मजबूती पर भरोसा जताया है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई, क्रूड ऑयील की ऊंची कीमत, कमजोर मानसून, El Niño, पश्चिम एशिया संघर्ष और ग्लोबल फाइनेंशियल रिस्क को बड़ी चुनौती बताया है। यानी RBI फिलहाल ग्रोथ को लेकर चिंतित नहीं है, लेकिन महंगाई को लेकर सतर्क हो गया है। भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ मजबूत होने के बावजूद RBI गवर्नर ने कई ऐसे रिस्क गिनाए हैं, जो आने वाले महीनों में ग्रोथ और इन्फ्लेशन दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
- Governor ने कहा कि “जियोपॉलिटिकल बदलावों के कारण वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष है। सितंबर में इसके दोबारा बढ़ने से क्रूड प्राइस में तेजी और वोलैटिलिटी बढ़ी है।
- दूसरी चुनौती कमजोर और असमान मानसून और El Niño का असर है। ये परिस्थितियां आने वाले रबी सीजन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, मजबूत गैर कृषि गतिविधियों और खपत से कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।
- तीसरी बड़ी चिंता ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन में व्यवधान है। RBI के मुताबिक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन व्यवधान के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर आ सकता है। इसके अलावा व्यापार में टकराव और वैश्विक वित्तीय स्थितियों की चुनौतियां भी ग्रोथ के आउटलुक को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और AI Stocks के वैल्यूएशन में बड़े करेक्शन को वैश्विक जोखिम माना है।

इकोनॉमी मजबूत लेकिन चुनौतियां कायम
GDP और ग्रोथ पर क्या कहा?
RBI गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर को मजबूत बताया है। उनके मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इकोनॉमिक मूमेंटम ब्रॉड बेस्ड है। इसे ध्यान में रखकर MPC ने 2026-27 की पहली तिमाही में रियल GDP ग्रोथ 7.8% का अनुमान रखा है। निजी खपत और निवेश गतिविधियों से भी ग्रोथ को मजबूती मिलने का अनुमान है। वहीं, एक्सपोर्ट भी पॉजिटिव बना हुआ है। इसी मजबूती के आधार पर RBI ने FY2026-27 के GDP ग्रोथ फोरकास्ट (Growth Forecast) को 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। Q2 के लिए 7.2%, Q3 के लिए 6.9% और Q4 के लिए 6.8% ग्रोथ का अनुमान है। RBI गवर्नर ने कहा कि अनुमान का यह अपग्रेड बताता है कि बड़ी ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद घरेलू इकोनॉम्ी में दम बना हुआ है।
महंगाई अब RBI के लिए बड़ी चुनौती
ग्रोथ के मोर्चे पर राहत के बावजूद RBI को सबसे ज्यादा चिंता महंगाई (Inflation) की है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई के मोर्चे पर हालात पिछले वर्ष की तरह अनुकूल नहीं है।अगस्त 2026 में CPI Inflation जुलाई के 4.5% से बढ़कर 4.8% हो गया। फूड और फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी के साथ कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) भी तीन महीने तक 3.9% पर स्थिर रहने के बाद बढ़कर 4.2% हो गया है। RBI के मुताबिक अगस्त में CPI बास्केट के करीब 37% आइटम की महंगाई दर 4% से ऊपर थी। यह संकेत है कि महंगाई का दबाव अब सिर्फ कुछ चुनिंदा खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं रहा है।
अल नीनो और मानसून ने बढ़ाई चिंता
RBI ने FY2026-27 के लिए CPI Inflation का अनुमान 5.2% और Core Inflation का अनुमान 4.4% रखा है। अगली तीन तिमाही में हेडलाइन CPI इन्फ्लेशन का औसत करीब 5.8% रहने का अनुमान है। उन्होंने खासतौर पर क्रूड ऑयल, प्याज और चीनी के दाम को लेकर चिंता जताई है। Inflation Risk के पीछे सबसे बड़ी वजह सप्लाई साइड प्रेशर को बताया गया है। कमजोर मानसून, El Niño और क्रूड की कीमतों को दाम बढ़ाने वाले प्रमुख जोखिम बताया है।
AI स्टॉक्स का वैल्यूएशन बाजार के लिए खतरा
Share Market के लिए RBI का संदेश मिला-जुला है। मजबूत GDP ग्रेाथ और बैंकिंग सिस्टम की बेहतर स्थिति सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन महंगी ब्याज दर और रेट कट की उम्मीद खत्म होना वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ाने वाले फैक्टर हैं। इसके अलावा ग्लोबल रिस्क भी बाजार को प्रभािवत करने वाले हैं, जिनका गवर्नर ने उल्लेख किया है। पॉलिसी स्टेटमेंट के मुताबिक Rate Hike के बावजूद क्रेडिट डिमांड में फिलहाल कमजोरी नहीं दिख रही। 15 सितंबर, 2026 तक बैंक क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर 18.1% है।
आम आदमी को फिलहाल कोई राहत नहीं
गवर्नर के पॉलिसी स्टेटमेंट में आम आदमी को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली चीज रेपो रेट है। इसे लेकर उन्होंने साफ कहा है कि निकट अवधि में रेट कट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। आगे पॉलिसी एक्शन केवल Rate Hike या Pause हो सकता है। यह बदलते हुए ग्रोथ और इन्फ्लेशन के आंकड़ों पर निर्भर करेगा कि ब्याज दर कितनी बढ़ेगी। यानी, नया कर्ज तो महंगा होगा ही, इसके साथ ही जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर Home Loan, Car Loan और दूसरे Floating Rate Loans की ब्याज दर बढ़ना तय है। हालांकि, रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर लोन की EMI तुरंत उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। इसका असर बैंक के बेंचमार्क और रीसेट सायकल पर निर्भर करेगा। वहीं, दूसरी तरफ FD जैसे निवेश पर भी इसका असर होगा। लेकिन, पॉलिसी स्टांस से साफ हो गया है कि आम आदमी को आने वाले दिनों में EMI बढ़ने के कई झटके लग सकते हैं।
