उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता दिवंगत मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल हो गई है। हेट स्पीच केस में अब्बास अंसारी को दो साल की सजा हुई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई थी। इसके बाद अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली और उनकी सजा को सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने आदेश जारी कर कहा है कि अब्बास अंसारी की विधानसभा की सदस्यता बहाल की जाती है।
आदेश जारी
विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। उन्होंने आदेश में कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा अंसारी के दोष सिद्धि को रद्द किए जाने के बाद पूर्व में पारित आदेश निष्प्रभावी माने जायेंगे। इससे पहले विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी गई थी और मऊ सदर सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली थी राहत
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 के भड़काऊ भाषण मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की दोषसिद्धि को 20 अगस्त को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति समीर जैन ने विशेष सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें उन्हें दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
क्या था मामला
मऊ की विशेष अदालत ने 31 मई को नफरती भाषण मामले में अब्बास को दोषी ठहराया और दो साल की कैद की सजा सुनाई थी। मऊ सदर सीट से सुभासपा के विधायक और पूर्व बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने नफरत भरे भाषण के मामले में दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनायी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मऊ सदर सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे अब्बास अंसारी ने तीन मार्च 2022 को पहाड़पुर मैदान में एक जनसभा के दौरान मऊ प्रशासन को चुनाव के बाद सबक सिखाने की धमकी दी थी। अंसारी की सदस्यता बहाल होने के बाद अब मऊ विधानसभा में उप चुनाव को लेकर शुरू हुई सियासी सरगर्मी पर भी विराम लग गया।
