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वंदे भारत ट्रेन पर फिर पत्थर से हमला, खिड़की का शीशा हुआ चकनाचूर; सांसद ने बयां की आंखों देखी घटना

Vande Bharat: लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद जिस ट्रेन से दिल्ली से कानपुर की यात्रा कर रहे थे, उसी वंदे भारत ट्रेन पर पत्थर से हमले का मामला सामने आया है। उन्होंने ये दावा किया है कि सुबह लगभग 7:12 बजे ट्रेन ने जैसे ही बुलंदशहर जिले के कमालपुर स्टेशन को पार किया, तभी बाहर से किसी असामाजिक तत्व ने पत्थर फेंके, जिससे उनसे दो सीट आगे बैठे यात्री के पास का शीशा चकनाचूर हो गया।

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वंदे भारत ट्रेन पर हमला।

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से आजाद समाज पार्टी-कांशीराम के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने रविवार को दावा किया कि वह जिस वंदे भारत ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, उस पर पत्थर फेंके गए और उन्होंने रेल मंत्री और प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। आजाद ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभिभावकों और स्कूल शिक्षकों का बच्चों को इस विषय पर जागरूक करने का भी आह्वान किया।

वंदे भारत ट्रेन पर फिर हुए पत्थर से हमला

सांसद आजाद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, 'आज सुबह मैं वंदे भारत ट्रेन से दिल्ली से कानपुर की यात्रा कर रहा था। सुबह सात बजकर 12 मिनट पर जैसे ही बुलंदशहर जिले के कमालपुर स्टेशन को पार किया, तभी बाहर से किसी असामाजिक तत्व ने पत्थर फेंके, जिससे मेरे से दो सीट आगे बैठे यात्री के पास का शीशा चकनाचूर हो गया।' उन्होंने कहा, 'इस घटना से मैं हतप्रभ और स्तब्ध रह गया। इस घटना से न केवल सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंची, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हुआ है। ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं और किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकतीं।'

सांसद चंद्रशेखर आजाद ने की ये अपील

आजाद ने कहा, 'एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में ऐसी घटनाओं का आंकड़ा 1503 तक पहुंच गया, जिससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। यह आंकड़ा सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं। ट्रेन पर पथराव से न केवल संपत्ति को क्षति होती है, बल्कि यह यात्रियों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'यह समझने की जरूरत है कि रेलवे देश की एक अमूल्य संपत्ति है और इसका संरक्षण देश के हम सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। समाज में इस तरह की हरकतें न केवल असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं बल्कि हमारे देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।'

रेल मंत्री और प्रशासन से कर दी ये मांग

सांसद ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री, रेलवे पुलिस और प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए तथा समाज में जागरुकता भी फैलानी चाहिए। उन्होंने ने अभिभावकों और अध्यापकों का आह्वान करते हुए कहा, 'मेरा निवेदन है कि परिवार में माता-पिता और स्कूलों में अध्यापकों के लिए बच्चों को इस विषय पर जागरूक करना जरूरी है। इससे न केवल ऐसी घटनाएं कम होंगी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो पाएगी।'

आजाद ने कहा, 'हम सभी को एक जागरूक नागरिक बनना चाहिए। यह देश हमारा है, और देश की संपत्ति की सुरक्षा केवल सरकार की ही नहीं बल्कि हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल कर्तव्य है।'

उन्होंने अपनी इस पोस्ट को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी टैग किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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