MK Stalin : केंद्र सरकार के परिसीमन योजना के खिलाफ मोर्चा खोल चुके तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दक्षिण के राज्यों सहित सात प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। दक्षिण भारत के राज्यों के अलावा स्टालिन ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब के अपने समकक्षों को लिखे पत्र में उनसे सहयोग की मांग की है। स्टालिन ने कहा है कि केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ एक संयुक्त एक्शन कमेटी बनाए जाने की बात कही है। राज्यों को आगाह करते हुए सीएम ने कहा कि परिसीमन का यह प्रस्ताव तमिलनाडु जैसे राज्यों का प्रभाव कम कर सकता है क्योंकि देश के बेहतर भविष्य के लिए तमिलनाडु ने अपनी आबादी पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया है।
पहले हो चुके परिसीमन का हवाला दिया
अपने इस पत्र में स्टालिन ने देश में पहले हो चुके परिसीमन का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि देश में परिसीमन 1952,1963 और 1973 में हुआ। इसके बाद यह 42वें संशोधन के जरिए यह प्रक्रिया 1976 में रोक दी गई। यह रोक 2000 की जनगणना तक कायम रही। साल 2002 में यह रोक फिर बढ़ा दी गई और कहा गया कि 2016 की जनगणना के बाद इसे कराया जाएगा। हालांकि, 2021 की जनगणना में देरी की वजह से परिसीमन की प्रक्रिया पहले कराई जा सकती है।
यह राज्यों के साथ अन्याय होगा-स्टालिन
स्टालिन का कहना है कि खासकर इससे वे राज्य ज्यादा प्रभावित होंगे जिन्होंने अपनी आबादी को नियंत्रित किया है और जिनका प्रशासन बेहतर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026 की जनगणना के आधार पर परिसीमन यदि होता है तो आबादी पर नियंत्रण पाने वाले राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। स्टालिन का कहना है कि इस तरह से ऐसे राज्यों के साथ यह अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से स्पष्टता नहीं दी है, केवल भरोसा दे रही है।
मध्य भारत के राज्यों को फायदा होगा-कांग्रेस
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने गुरुवार को कहा कि यदि परिसीमन प्रक्रिया ‘एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत पर होती है तो केवल मध्य भारत के राज्यों को फायदा होगा, जबकि वे जनसंख्या नियंत्रण के मामले में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन के लिए नया फॉर्मूला तैयार करने की जरूरत है। लोकसभा सदस्य ने यह मांग उस वक्त की है जब तमिलनाडु में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के जनसंख्या-आधारित परिसीमन का विरोध किया गया है। तिवारी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यदि परिसीमन ‘एक वोट, एक मूल्य’ के मौजूदा सिद्धांत पर किया जाता है, तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों में लोकसभा सीट तुलनात्मक रूप से हो जाएंगी तथा केवल मध्य भारत के राज्यों को फायदा होगा।
