Marco Rubio India Visit: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे। उनका यह दौरा 23 से 26 मई तक है। ट्रंप प्रशासन में यह अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद रूबियो की यह पहली भारत यात्रा है। अपनी इस दौरे में वह कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली की यात्रा करेंगे।
कोलकाता पहुंचने के बाद मार्को रुबियो और उनकी पत्नी, जेनेट डी रुबियो ने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय का दौरा किया और इसके अधिकारियों से बातचीत की। मदर टेरेसा द्वारा कोलकाता में स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी, एक कैथोलिक संस्था है जो दुनिया भर में गरीब, बीमार और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित है।
रूबियो के इस दौरे के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि अपनी भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे और उनके साथ ऊर्जा सुरक्षा, कारोबार और रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे। साथ ही रूबियो की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा ने लोगों का ध्यान खींचा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीते एक दशक में कोलकाता की यात्रा पर जाने वाले वह अमेरिका के पहले विदेश मंत्री होंगे।
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होंगे शामिल
अपने चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान मार्को रूबियो के क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने की संभावना है। भारत अगले सप्ताह क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर सकता है।नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, रूबियो अपने 'भारत के पहले दौरे', क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठकों और उच्चस्तरीय वार्ताओं में भाग लेंगे। साथ ही वे अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के समारोह में भी शामिल हो सकते हैं। 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेन्नी वांग और जापान के विदेश मंत्री तोशीमित्सू मोटेगी के शामिल होने की संभावना है। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
व्यापार वार्ता पर भी बातचीत की संभावना
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता भी इस दौरे का अहम मुद्दा हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर पहले पैदा हुए मतभेदों के बाद हाल के महीनों में बातचीत में फिर तेजी आई है।
कोलकाता ही क्यों पहुंचे रुबियो?
रूबियो की कोलकाता यात्रा को अमेरिका की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि कोलकाता में स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास दुनिया में अमेरिका के सबसे पुराने दूतावासों में से एक है। दरअसल, 19 नवंबर 1792 को अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने बेंजामिन जॉय को कोलकाता के लिए पहला अमेरिकी प्रतिनिधि नियुक्त किया था। हालांकि, वह अप्रैल 1794 में कोलकाता पहुंचे और उस समय भारत पर शासन कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी ने उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं दी थी। इसके बावजूद, जॉय की नियुक्ति ने भारत और अमेरिका के बीच आधिकारिक संबंधों और संवाद की नींव रखी, जिससे कोलकाता अमेरिकी कूटनीति का एक ऐतिहासिक केंद्र बन गया।
