पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि केंद्र सरकार के फंड रोकने के बावजूद राज्य सरकार 88 फास्ट‑ट्रैक कोर्ट्स लगातार चला रही है। शनिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की सर्किट बेंच, जलपाईगुड़ी के नए भवन उद्घाटन किया गया । इस मौके पर सीएम ममता बनर्जी, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि इन 88 कोर्ट्स में से 52 महिलाओं के लिए और 7 POCSO कोर्ट्स हैं, जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई तेजी से कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि फंड रुकने के बावजूद बंगाल सरकार ने इन अदालतों को बंद नहीं होने दिया।
सीएम ममता ने कहा, "मेरे लॉ मिनिस्टर, कृपया बुरा न मानें, केंद्र सरकार ने फंड रोक दिया, लेकिन हमने इन अदालतों को जारी रखा।" उनका यह बयान न्यायपालिका के महत्व और आम नागरिकों को न्याय मिलने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। बता दें कि इस समारोह में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे।
न्यायपालिका का उद्देश्य केवल न्याय देना है: सीएम ममता
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल न्याय देना है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की सुनवाई में कोई बाधा न आए। उन्होंने स्थानीय न्यायाधीशों और अधिकारियों से भी न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।
राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, फास्ट‑ट्रैक कोर्ट्स का यह कदम महिलाओं और बच्चों के मामलों की तेज सुनवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ममता का बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य के बीच सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर तालमेल पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
इस कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को दोहराया।
सीएम ममता ने संविधान और मीडिया के महत्व पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच की नई इमारत के उद्घाटन के अवसर पर न्यायपालिका, संविधान और मीडिया के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक, संविधान, न्यायपालिका और मीडिया ही लोकतंत्र की आधारशिला हैं और इनकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कनिष्ठ वकीलों की चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई युवा वकील अपने अधिकारों और उचित लाभ से वंचित हैं। ममता ने न्यायाधीशों से अपील की कि वे कनिष्ठ वकीलों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें न्याय सुनिश्चित करें।
ममता ने मीडिया और मानहानि के मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजकल लोगों को बदनाम करने का चलन बढ़ गया है और कई संस्थाएं जानबूझकर मानहानि कर रही हैं। उन्होंने न्यायपालिका से आग्रह किया कि किसी भी मामले को अंतिम निर्णय देने से पहले मीडिया ट्रायल से बचा जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “लोकतंत्र बचाओ, जनता बचाओ, संविधान बचाओ। न्यायपालिका सर्वोच्च है और इसे संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। हमारी सुरक्षा, इतिहास, भूगोल और सीमा की रक्षा भी न्यायपालिका के मार्गदर्शन में ही संभव है।”
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश मौजूद थे। ममता का यह संदेश न्यायपालिका के महत्व और लोकतंत्र के संरक्षक के रूप में न्यायाधीशों की भूमिका को रेखांकित करता है।
