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गाड़ी में चार-चार पुलिसकर्मी, फिर भी अक्षय शिंदे ने छीन ली रिवॉल्वर? हाईकोर्ट ने किए तीखे सवाल

Akshay Shinde Encounter: सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी अक्षय शिंदे ने अचानक पुलिस अधिकारी की कमर में लगी पिस्तौल निकाली और तीन राउंड फायरिंग की। इस पर अदालत ने सवाल किया कि घटना के वक्त गाड़ी में चार पुलिस अधिकारी मौजूद थे, जो पूरी तरह से प्रशिक्षित थे। क्या आरोपी इन सब पर हावी हो सकता है और पिस्तौल छीन सकता है? इसे समझना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

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बदलापुर कांड का आरोपी अक्षय शिंदे।

Photo : Twitter

Akshay Shinde Encounter: बदलापुर यौन उत्पीड़न के आरेापी अक्षय शिंदे के एनकाउंटर पर हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। अक्षय शिंदे की एनकाउंटर की थ्योरी पर हाईकोर्ट ने पुलिस पर शक जाहिर किया है। इसके साथ ही आरोपी अक्षय शिंदे को जेल से बाहर निकालने से लेकर मौत तक की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि यह समझना मुश्किल है कि आरोपी चार-चार पुलिस कर्मियों पर हावी हो गया और उसका एनकाउंटर करना पड़ा। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को फॉरेंसिक लैब की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई अब 3 अक्टूबर को होगी।

दअरसल, अक्षय शिंदे मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपी शिंदे को अस्पताल देर से पहुंचाने पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने पूछा कि घटना के कितने देर बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया? क्या घटनास्थल के आसपास कोई अस्पताल मौजूद नहीं था। बता दें, 23 सितंबर की शाम 7:52 बजे डॉक्टरों ने आरोपी अक्षय शिंदे को मृत घोषित कर दिया। इस मामले में 24 सितंबर की सुबह 4:56 बजे केस दर्ज किया गया और रात आठ बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था।

आरोपी ने की तीन राउंड फायरिंग

अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी अक्षय शिंदे ने अचानक पुलिस अधिकारी की कमर में लगी पिस्तौल निकाली और तीन राउंड फायरिंग की। इस पर अदालत ने सवाल किया कि घटना के वक्त गाड़ी में चार पुलिस अधिकारी मौजूद थे, जो पूरी तरह से प्रशिक्षित थे। इनमें एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी था। क्या आरोपी इन सब पर हावी हो सकता है और पिस्तौल छीन सकता है? इसे समझना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। अदालत ने आदेश दिया है कि आरोपी के अपने बैरक से बाहर आने, वाहन में बैठने, अदालत जाने और शिवाजी लाने तक का सीसीटीवी सुरक्षित रखा जाए।

ज्यादा खून बहने से हुई आरोपी की मौत

आरोपी अक्षय शिंदे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आई है। इसमें खुलासा हुआ है कि अक्षय शिंदे के सिर में गोली लगी थी और ज्यादा खून बहने की वजह से उसकी मौत हो गई थी। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि अक्षय शिंदे की मौत ब्लीडिंग का बड़ा कारण ज्यादा खून बहना था। बता दें, चर्चित बदलापुर यौन शोषण केस के आरोपी अक्षय शिंद को पुलिस ने सोमवार को एनकाउंटर में मार गिराया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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