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महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में लगेगी शिवाजी की 60 फीट ऊंची प्रतिमा, शिंदे सरकार ने जारी किया टेंडर

Chhatrapati Shivaji statue: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में बीते 26 अगस्त को शिवाजी की 35 फीट ऊंची प्रतिमा ढह गई थी। इसको लेकर राज्य में काफी सियासी हंगामा हुआ था। अब एकनाथ शिंदे सरकार ने 60 फीट ऊंची मूर्ति के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है।

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महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्ति गिरने की घटना

Photo : BCCL

Chhatrapati Shivaji statue: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके लिए एकनाथ शिंदे सरकार की ओर से टेंडर जारी कर लिया गया है। यह प्रतिमा 60 फीट ऊंची होगी। जानकारी के मुताबिक, शिवाजी की 60 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने में 20 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही शिंदे सरकार ने 6 महीने में मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया है।

बता दें, बीते महीने 26 अगस्त को सिंधुदुर्ग के राजकोट किले में लगी 35 फीट ऊंची शिवाजी की मूर्ति तेज़ हवा के चलते ढह गई थी। दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री मोदी ने इस मूर्ति का अनावरण किया था। शिवाजी की मूर्ति गिरने से राज्य की सियासत भी गर्म हो गई थी। विपक्ष ने इसको मुद्दे को लेकर एकनाथ शिंदे सरकार पर कई आरोप भी लगाए थे।

पीडब्ल्यूडी ने दी जानकारी

पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि नई प्रतिमा के निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि नयी प्रतिमा की ऊंचाई 60 फुट होगी। अधिकारी ने बताया, अब इसकी इंजीनियरिंग, स्थापना और रखरखाव सहित कुल लागत 20 करोड़ रुपये होगी। सरकार ने इस काम पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया है। प्रतिमा की ऊंचाई 60 फुट होगी।

शिंदे से लेकर फडणवीस तक ने मांगी भी माफी

बता दें, महाराष्ट्र में शिवाजी के मूर्ति का इस तरह गिरना बड़ा सियासी मुद्दा बन गया था। विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा था कि शिवाजी की मूर्ति बनाने में भी भ्रष्टाचार हुआ है। इसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद फडणवीस से लेकर अजीत पवार तक को सामने आना पड़ा था। तीनों नेताओं ने मूर्ति गिरने पर माफी मांगी थी। इसके साथ ही इसी जगह पर नई मूर्ति स्थापित करने का भी ऐलान किया था। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मूर्ति के गिरने पर सार्वजनिक तौर पर महाराष्ट्र के लोगों के प्रति खेद प्रकट किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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