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लोकसभा में अभी जितनी हिस्सेदारी उसी के अनुरूप बढ़ेंगी सीटें! संसद में विपक्ष को भरोसे में लेगी सरकार

रिपोर्टों के मुताबिक कैबिनेट द्वारा महिलाओं के आरक्षण और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लागू करने के लिए मंजूर किए गए तीनों विधेयकों में राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में अनुपातिक (प्रो-राटा) बढ़ोतरी का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया जा सकता था।

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लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का है प्रस्ताव।

Photo : PTI

Loksabha Seats: लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सरकार गुरुवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश कर रही है। इसमें एक परिसीमन विधेयक 2026 भी है। इस विधेयक के पारित होने के बाद देश में लोकसभा की सीटों का नए सिरे परिसीमन होगा। विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस तरह की रिपोर्टें हैं कि नए परिसीमन में दक्षिण क्षेत्र में लोकसभा सीटों की हिस्सेदारी घट सकती है। सूत्रों का कहना है कि इसे धारणा को दूर करने के लिए सरकार संसद में गुरुवार को 'शेड्यूल' पेश करेगी। सरकार प्रत्येक राज्य की लोकसभा सीटों के बारे में संसद को स्पष्ट रूप से बताएगी। सरकार यह भी बताएगी लोकसभा की कुल सीटों में प्रत्येक राज्य की हिस्सेदारी अभी जितनी है, उतनी ही बाद में भी रहने वाली है।

विपक्षी दलों का भ्रम दूर करेगी सरकार

रिपोर्टों के मुताबिक कैबिनेट द्वारा महिलाओं के आरक्षण और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लागू करने के लिए मंजूर किए गए तीनों विधेयकों में राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या में अनुपातिक (प्रो-राटा) बढ़ोतरी का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया जा सकता था। सूत्रों के अनुसार, इसका प्रावधान ‘शेड्यूल’ में किया जाएगा। एक सूत्र ने कहा, 'किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा, सब कुछ कानूनी तरीके से किया जाएगा।' उदाहरण के तौर पर, अगर वर्तमान लोकसभा में तमिलनाडु की 39 सीटें हैं और कुल सीटों में उसकी हिस्सेदारी 7.2% है, तो लोकसभा की कुल संख्या बढ़कर 850 तक होने पर भी उसकी हिस्सेदारी 7.2% ही बनी रहेगी। अनुमान है कि हर राज्य की सीटों की संख्या में लगभग 50% की बढ़ोतरी होगी। इस हिसाब से तमिलनाडु की सीटें बढ़कर करीब 57 या 58 हो सकती हैं।

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विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे स्टालिन

समझा जाता है कि सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्ष की आलोचना कम हो सकती है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका कहना है कि उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में जनसंख्या में तेज वृद्धि हुई है, और यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया, तो इन राज्यों की हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी।

    दक्षिण क्षेत्र की लोकसभा सीटें ज्यादा प्रभावित होंगी

    रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नया परिसीमन यदि लागू हो जाता है तो कुल सीटों में दक्षिण क्षेत्र की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत से कम होकर 20.7 प्रतिशत पर आ जाएगी जबकि हिंदी भाषी राज्यों की हिस्सेदारी 38.1 प्रतिशत से बढ़कर 43.1 फीसदी हो जाएगी। जाहिर है कि इससे राज्यों की खासकर दक्षिण क्षेत्र की लोकसभा सीटें प्रभावित होंगी। 2011 की जनगणना को आधार बनाकर प्रस्तावित परिसीमन होने पर लोकसभा की सीटों में इस तरह की वृद्धि होने का अनुमान है।

    इन राज्यों में बढ़ सकती हैं सीटें

    नए परिसीमन के बाद कई राज्यों की लोकसभा सीटों में वृद्धि होने का अनुमान है। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं, यहां सीटें बढ़कर 125 हो सकती हैं जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 62, महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 75, तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 61 और केरल में 20 से बढ़कर 31 सीटें हो सकती हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्यों में सीटें बढ़ने का प्रतिशत तो एक होगा लेकिन इससे संख्या बदल जाएगी। नए परिसीमन में यूपी में जहां 45 सीटें बढ़ेंगी वहीं तमिलनाडु के हिस्से में 22 सीटें ही पाएंगी। विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार बिना उससे सलाह मशविरा किए ये विधेयक ला रही है।

    Alok Rao
    आलोक कुमार रावauthor

    19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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