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लारेंस बिश्नोई के गिरोह को 24 घंटे में खत्म कर सकता हूं : पप्पू यादव

Pappu Yadav News: पप्पू यादव ने कहा, यह देश है या हिजड़ों की फौज। एक अपराधी जेल में बैठ चुनौती दे लोगों को मार रहा है, सब मूकदर्शक बने हैं। उन्होंने कहा, कभी मूसेवाला, कभी करणी सेना के मुखिया, अब एक उद्योगपति राजनेता को मरवा डाला।

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लॉरेंस बिश्नोई-पप्पू यादव।

Pappu Yadav News: बिहार से लोकसभा सदस्य पप्पू यादव ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर सनसनीखेज बयान देकर हंगामा मचा दिया है। उन्होंने कहा है कि वह लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह को '24 घंटे के भीतर खत्म कर सकते हैं'। बता दें, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे बिश्नोई के होने का संदेह है।

पूर्णिया के सांसद ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने गोपालगंज में जन्मे बाबा सिद्दीकी को बिहार का बेटा कहा और महाराष्ट्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधा। पप्पू यादव ने कहा, यह देश है या हिजड़ों की फौज। एक अपराधी जेल में बैठ चुनौती दे लोगों को मार रहा है, सब मूकदर्शक बने हैं। उन्होंने कहा, कभी मूसेवाला, कभी करणी सेना के मुखिया, अब एक उद्योगपति राजनेता को मरवा डाला। यादव ने कहा, कानून अनुमति दे तो 24 घंटे में इस लारेंस बिश्नोई जैसे दो टके के अपराधी के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दूंगा।

बाबा सिद्धीकी की हत्या शर्मनाक

उन्होंने कहा, महाराष्ट्र में महाजंगलराज वाई सिक्योरिटी सुरक्षा में सरकार समर्थक पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी जी की हत्या इसका शर्मनाक प्रमाण! बिहार के बेटे बाबा सिद्दीकी की हत्या अत्यंत दुःखद है, भाजपा गठबंधन सरकार अपने दल के इतने रसूख़ वाले नेताओं की रक्षा न कर पा रही है तो आमलोगों का क्या होगा?। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर यादव निर्दलीय मैदान में उतरे थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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