Who is Siddaramaiah: साल 2028 में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से हटने का बड़ा संकेत दिया है। मंड्या में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने घोषणा की कि वह 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही भविष्य में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार बनेंगे।
अपने इस फैसले का कारण बताते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि वर्ष 2028 में उनकी राजनीति (Siddaramaiah Political Career) के 50 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने बेहद भारी मन से कहा कि आजकल राजनीति में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है और ईमानदार राजनीति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। उनके इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
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राजनेता बनने से पहले थे वकील
12 अगस्त 1948 को जन्मे सिद्धारमैया ने मैसूर विश्वविद्यालय से बीएससी और फिर कानून की पढ़ाई की। राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक सफल वकील के रूप में काम करते थे। वह कर्नाटक के प्रभावशाली कुरबा समुदाय से आते हैं।

Siddaramaiah biography (Photo: X/@siddaramaiah)
भारतीय लोकदल से लड़ा पहला चुनाव
जो आबादी के लिहाज से राज्य का तीसरा सबसे बड़ा समूह है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1983 में भारतीय लोकदल के टिकट पर चामुंडेश्वरी सीट से चुनाव जीतकर की थी। वह इस निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार जीते, हालांकि तीन बार उन्हें हार भी देखनी पड़ी।
सिद्धारमैया 'कन्नड़ कवलू समिति' के पहले अध्यक्ष भी रहे। 1992 में उन्हें जनता दल का महासचिव बनाया गया। इसके बाद वह 1994 में देवेगौड़ा सरकार में वित्त मंत्री और 1996 में उपमुख्यमंत्री बने। हालांकि, 1999 में मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद वह जनता दल (सेक्युलर) में शामिल हो गए। साल 2004 में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में वह दोबारा डिप्टी सीएम बने, लेकिन देवेगौड़ा से मतभेदों के चलते 2005 में उन्हें जेडीएस से निकाल दिया गया, जिसके बाद 2006 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

Karnataka Former CM Siddaramaiah (Photo: X/@siddaramaiah)
सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले नेता
सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर काफी शानदार रहा है। उन्होंने 2013 से 2018 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 20 मई 2023 से जून 2026 तक वह दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री रहे, जिसके बाद 3 जून 2026 को डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान सिद्धारमैया कर्नाटक के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन गए, और उन्होंने डी. देवराज उर्स का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
चुनावी उतार-चढ़ाव की बात करें तो 2018 के चुनाव में मुख्यमंत्री रहते हुए वह चामुंडेश्वरी सीट से जेडीएस के जी.टी. देवगौड़ा से चुनाव हार गए थे, लेकिन उन्होंने बादामी सीट से जीत दर्ज कर अपनी साख बचाई थी। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने वरुणा निर्वाचन क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 46,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। अब 50 साल लंबे इस शानदार और जुझारू सियासी सफर के बाद उनका यह फैसला कर्नाटक की राजनीति में एक युग के अंत का संकेत दे रहा है।
