Jyotiraditya Scindia vs Digvijay Singh : मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी रणभेरी बज चुकी है। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों दलों ने चुनाव की तैयारियां भी जोरदार तरीके से शुरू कर दी है। आज एमपी की सियासत में उस वक्त एक नया ट्विस्ट आ गया जब राजघराने के दो नेता आमने-सामने आ गए। दरअसल, हम बात कर रहे हैं पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व दो बार के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की। दिग्विजय ने सार्वजनिक तौर पर आज सिंधिया को चुभने वाली कह दी बस फिर क्या था ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्विटर पर उनकी क्लास लगा दी।
क्या बोले थे दिग्विजय सिंह
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज शाजापुर में मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कमलनाथ सरकार के कामों को गिनाया और कहा "हमने (कांग्रेस) सत्ता में आते ही एक लाख तक के किसानों के कर्ज माफ कर दिए थे भाजपा ने हम पर कई आरोप लगाए, तब हमने आंकड़े भी जनता के सामने रख दिए थे।" दिग्विजय यहीं नहीं रुके उन्होंने कमलनाथ सरकार के गिरने का कारण बताते हुए कहा कि "दरअसल, कुछ बड़े-बड़े जमींदार और राजा-महाराजा बिक गए थे।" उनका इशारा ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर था और फिर वे बोले कि "हे महाकाल, कांग्रेस में कोई दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया पैदा ना हो।"
सिंधिया ने भी लगा दी क्लास
एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय ने ये भी कहा था कि जिस समय भाजपा ने कमलनाथ सरकार को गिराया था उस समय सिंधिया बीजेपी के हाथों बिक गए थे। ये बयान सामने आते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया भी फ्रंटफुट पर आ गए और ट्विटर पर दिग्विजय सिंह की क्लास लगा दी। उन्होंने लिखा कि "हे प्रभु महाकाल, कृपया दिग्विजय सिंह जी जैसे देश-विरोधी और मध्य प्रदेश के बंटाधार, भारत में पैदा ना हों।"
पहले भी दोनों के बीच हुई तकरार
ये पहली बार नहीं है जब दिग्विजय ने सिंधिया पर ऐसी कोई टिप्पणी की है बल्कि इन दोनों के नेताओं के बीच पहले भी कई बार ऐसी जुबानी जंग हो चुकी है। पूर्व में जब दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को गद्दार कहकर संबोधित किया था तब सिंधिया ने मीडिया के सामने आकर उन्हें करारा जवाब दिया था। केंद्रीय मंत्री ने उस वक्त कहा था, "जो ओसामा को ओसामा जी कहे तो गद्दार कौन है, ये जनता देख रही है।" सिंधिया ने कहा था कि "वे उस स्तर तक नीचे नहीं गिर सकते सिंधिया परिवार का एक स्तर है और उसे वे बनाए रखेंगे।" बता दें कि राजघराने के दोनों परिवारों के बीच ये लड़ाई काफी पुरानी है, जिसकी बानगी प्राय: राज्यसभा में दोनों नेताओं के बीच देखी जा सकती है।
