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Kolkata Doctor Starkie: जूनियर डॉक्टरों ने 17 दिनों के बाद भूख हड़ताल ली वापस , 22 अक्टूबर की हड़ताल भी कैंसिल

जूनियर डॉक्टरों ने 17 दिनों के बाद भूख हड़ताल वापस ले ली है और 22 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के सभी अस्पतालों में बुलाई गई हड़ताल भी वापस ले ली है।

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जूनियर डॉक्टरों ने 17 दिनों के बाद भूख हड़ताल ली वापस

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक के कुछ घंटे बाद आंदोलनकारी जूनियर चिकित्सकों ने आर जी कर अस्पताल में एक महिला चिकित्सक के साथ कथित बलात्कार एवं हत्या की घटना को लेकर सप्ताह भर से जारी भूख हड़ताल सोमवार शाम वापस ले ली।

चिकित्सकों ने मंगलवार से पूरे राज्य में अस्पतालों में अपनी प्रस्तावित हड़ताल भी वापस ले ली।आंदोलनकारी चिकित्सक देबाशीष हल्दर ने कहा, ‘‘(मुख्यमंत्री के साथ) आज की बैठक में हमें कुछ आश्वासन तो मिला, लेकिन राज्य सरकार का हाव-भाव सकारात्मक नहीं था... आम लोगों ने दिल से हमारा समर्थन किया है। वे और हमारी मृतक बहन (आरजी कर अस्पताल की पीड़िता) के माता-पिता हमसे अनुरोध कर रहे हैं कि हमारे बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए हम भूख हड़ताल खत्म कर दें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हम अपना ‘आमरण अनशन’ और मंगलवार को स्वास्थ्य क्षेत्र में किये गये पूर्ण बंद के आह्वान को वापस ले रहे हैं।’’

यह निर्णय चिकित्सकों की एक आम बैठक के बाद किया गया।

फिलहाल कुल सात जूनियर डॉक्टर भूख हड़ताल पर थे, इनमें से सात सेंट्रल कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मंच पर हैं और एक दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के परिसर में है।अब तक, 5 अक्टूबर की शाम से शुरू हुई भूख हड़ताल में हिस्सा ले रहे छह जूनियर डॉक्टरों की तबीयत बहुत खराब हो गई है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की 10 सूत्री मांगे

प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की 10 सूत्री मांगों में सबसे विवादास्पद मांग राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाना है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टरों से फोन पर बातचीत के दौरान साफ कहा कि उनकी ओर से इस मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।

इससे पहले 20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु चिकित्सक की कथित बलात्कार के बाद हत्या की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार से अपनी 10-सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलनरत कनिष्ठ चिकित्सकों को रविवार शाम नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों का भी साथ मिला था।

आंदोलनकारी मृतक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के लिए न्याय की मांग कर रहे

नागरिक समाज संगठनों के सदस्य तख्तियां लेकर, मोमबत्तियां जलाकर और महिलाओं द्वारा शंख बजाकर आंदोलनकारी चिकित्सकों के समर्थन में एकजुटता दिखाने के लिए रैली में शामिल हुए थे, ये आंदोलनकारी मृतक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

कनिष्ठ चिकित्सकों की मांगों के प्रति सहानुभूति जताते हुए चैती घोषाल, देबलीना दत्ता और सौम्या बनर्जी सहित बांग्ला फिल्म एवं टेलीविजन उद्योग के कई अभिनेताओं ने विरोध स्थल के पास एक दिन की भूख हड़ताल की।

गीत और कविता पाठ के साथ एक और विरोध सभा आयोजित की गई थी

कनिष्ठ चिकित्सकों के विरोध स्थल से लगभग दो किलोमीटर दूर ललित कला अकादमी के पास नुक्कड़ नाटक, गीत और कविता पाठ के साथ एक और विरोध सभा आयोजित की गई थी।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों की ये है मांगे

प्रदर्शनकारी चिकित्सक अपनी मृतका सहकर्मी को न्याय दिलाने एवं स्वास्थ्य सचिव को पद से हटाने के अलावा राज्य के सभी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए एक केंद्रीकृत रेफरल प्रणाली स्थापित करने, कार्यस्थलों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने, ऑन-कॉल रूम और वॉशरूम जैसे आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए टास्क फोर्स के गठन की मांग कर रहे हैं।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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