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जम्मू कश्मीर: उधमपुर में मिली दो पुलिसकर्मियों की लाश, शरीर पर मिले गोलियों के निशान

Jammu Kashmir News: करीब साढ़े छह बजे जिला मुख्यालय स्थित काली माता मंदिर के बाहर पुलिस वैन के अंदर पुलिसकर्मियों के गोलियों से छलनी शव मिले। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।

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उधमपुर में पुलिस वैन के अंदर मिले पुलिसकर्मियों के शव।

Photo : ANI

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में रविवार तड़के दो पुलिसकर्मी मृत पाए गए। उनके शरीर पर गोलियां लगने के निशान मिले हैं। अधिकारियों को शक है कि आपसी रंजिश के कारण दोनों ने एक-दूसरे की हत्या कर दी। अधिकारियों का कहना है कि संभवत: दोनों पुलिसकर्मियों ने एक दूसरे पर गोलियां चलाईं जिससे उनकी मौत हो गई।

मौके पर पहुंचे अधिकारियों के मुताबिक, तड़के करीब साढ़े छह बजे जिला मुख्यालय स्थित काली माता मंदिर के बाहर पुलिस वैन के अंदर पुलिसकर्मियों के गोलियों से छलनी शव मिले। उन्होंने बताया कि पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों पुलिसकर्मियों की मौत संभवत: एक-दूसरे पर गोलियां चलाने के कारण हुई।

एके-47 से मारी एक दूसरे को गोली

उधमपुर एसएसपी अमोद नागपुरे ने बताया कि रहमबल इलाके में दो पुलिसकर्मियों के शव मिले हैं। उन्होंने बताया कि ये पुलिसकर्मी सोपोर से तलवारा में प्रशिक्षण केंद्र की ओर जा रहे थे। शुरुआती जांच के अनुसार, यह साबित हो गया है कि घटना में एके-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया था। आगे की जांच जारी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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