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जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई; CIK ने की कई जगहों पर छापेमारी, LeT का अंतरराष्ट्रीय भर्ती नेटवर्क हुआ बेनकाब

जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने घाटी में व्यापक छापेमारी के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भर्ती नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में पता चला कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान और बांग्लादेश में सक्रिय सहयोगियों के साथ समन्वय करके काम कर रहा था। इस मामले में आतंकवादी शब्बीर अहमद लोन सबसे प्रमुख और वांछित आरोपी के रूप में सामने आया है।

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काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने किया LeT के खतरनाक नेटवर्क का खुलासा (सांकेतिक फोटो)

Photo : iStock

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर पुलिस की 'काउंटर इंटेलिजेंस विंग' ने गैरकानूनी गतिविधियों निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज एक मामले में घाटी के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी करते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भर्ती नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों के अनुसार, काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने श्रीनगर, गंदेरबल और शोपियां जिलों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया, जिसके दौरान यह मॉड्यूल उजागर हुआ। यह नेटवर्क सीमा पार के आतंकियों और बांग्लादेश में मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर कार्य कर रहा था।

घाटी में 10 जगहों पर छापे मारे गए

अधिकारियों ने बताया कि यूएपीए के तहत सीआईके थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 01/2026 के संबंध में श्रीनगर में एनआईए अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने तलाशी वारंट जारी किया था, जिसपर अमल करते हुए घाटी में 10 जगहों पर छापे मारे गए। जांच के दौरान पता चला कि यह मॉड्यूल लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का आतंकवादी शब्बीर अहमद लोन संभाल रहा है, जो मूल रूप से मध्य कश्मीर के गंदेरबल जिले के कंगन क्षेत्र से है और कई उपनामों जैसे राजू और जफर सादिक का इस्तेमाल करता है।

'दौरा-ए-आम' और 'दौरा-ए-खास'

एक अधिकारी ने आगे कहा, "यह हैंडलर बेहद कट्टर और प्रशिक्षित है और इसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हथियार चलाने का प्रशिक्षण ('दौरा-ए-आम' और 'दौरा-ए-खास') हासिल किया है।" जानकारी के मुताबिक, 'दौरा-ए-आम' में, आतंकवादी संगठन के सदस्यों को 21 दिन तक छोटे हथियार और ग्रेनेड फेंकने की बुनियादी ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद तीन महीने की विशेष प्रशिक्षण अवधि होती है, जिसे 'दौरा-ए-खास' कहा जाता है, जिसमें उन्हें एके राइफल, हल्की मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर चलाना और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

आतंकवादियों की भर्ती और नेटवर्क का विस्तार

अधिकारियों के अनुसार, लोन ने 1990 के दशक के अंत में एक आतंकवादी संगठन के सहयोगी के रूप में कार्य शुरू किया और 2000 के दशक की शुरुआत में वह लश्कर में शामिल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद वह बांग्लादेश की सीमा के रास्ते भारत में घुसपैठ करके कई बड़े हमलों की साजिशों में शामिल रहा और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रहा। भारत में कानूनी कार्रवाई के बाद वह बांग्लादेश चला गया, जहां से वह आतंकवादियों की भर्ती और नेटवर्क का विस्तार करने का काम कर रहा है।

सबसे खतरनाक और वांछित आतंकवादी

अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि लोन प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के बड़े सदस्यों के करीबी संपर्क में है और उसने सीमा-पार आतंकवादी मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने में अहम भूमिका निभाई है, जिनमें हाल ही में देश के कई हिस्सों में स्थापित किए गए मॉड्यूल शामिल हैं। उन्होंने कहा, "माना जा रहा है कि वह वर्तमान में बांग्लादेश में मौजूद है और अपने सहयोगियों के नेटवर्क के जरिए गतिविधियों को संचालित कर रहा है। इस प्रकार वह विदेश से काम करने वाला सबसे खतरनाक और वांछित आतंकवादी बन गया है।"

(इनपुट - भाषा)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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